Archimedes ka Siddhant

आर्किमिडीज सिद्धांत (उत्पलावन बल ) : Archimedes ka Siddhant

आज हम इस लेख के माध्यम से आर्किमिडीज़ का सिद्धान्त (Archimedes Principle in Hindi) क्या होता है ? एसीबी क्या होता है? यह कैसे वर्क करता है? एसीबी के अलग-अलग प्रकार कौन-कौन से होते हैं? एसीबी के अनुप्रयोग (Applications) क्या-क्या होते हैं? आदि के बारे में बताने वाले हैं।

दोस्तों यदि आप एसीबी से संबंधित सभी जानकारियां प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारा यह लेख पूरा जरूर पढ़ें।

आर्किमिडीज़ कौन थे ? 

आर्किमिडीज़ एक महान यूनानी गणितज्ञ थे, जिनका जन्म 287 ईसा पूर्व सिरैक्यूज़, सिसिली में हुआ था। आर्किमिडीज़ ने गणित , भौतिक विज्ञान  , अभियांत्रिकी (Engineering), खगोल विज्ञान (Astronomy) और यांत्रिकी (Mechanics) के क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण खोज/शोध किये थे।

आर्किमिडीज़ सिद्धान्त के पीछे की कहानी : Archimedes Story in Hindi

कहा जाता है कि यूनान के राजा हिरो द्वितीय ने अपने लिए सोने का मुकुट बनाने के लिए सोनार को कुछ सोना दिया, लेकिन जब राजा ने सोनार द्वारा बनाए हुए मुकुट को देखा तो उन्हें अपने द्वारा दिए सोने की अपेक्षा उसका भार कम लगा।

राजा ने मुकुट की सुद्धता पता करने के लिए जब आर्किमिडीज़ से कहा तो आर्किमिडीज़ सोच मे पड़ गये और एक दिन जब अपने टब मे नहाने के लिए घुसे तब नहाते हुए उन्होंने सोचा कि पानी में नहाते समय हमारे भार मे कमी का आभास क्यों होता है, और फिर उन्होंने नहाते हुए टब में पानी के स्तर को देखा जो कि पहले से बढ़ा हुआ था, तब वह सोचने लगे कि शायद पानी में नहाते समय हमारे भार मे जो कमी का आभास हो रहा है, वह इस बढ़े हुए पानी के भार के बराबर हो सकता है।

इस सोच से प्रेरित होकर उन्होंने एक प्रयोग किया, उन्होंने एक बड़ा-सा बर्तन लिया और उसे पूरी तरह पानी से भर दिया। अब सोने का मुकुट लेकर उस बर्तन मे डाला जो कि पानी से पूरा भरा था, सोने के मुकुट को बर्तन मे डालने पर बर्तन से निकले पानी को एकत्रित कर लिया।

इस प्रकार जब उन्होंने मुकुट को बर्तन मे डाला तो पाया कि बाहर की अपेक्षा पानी मे डले मुकुट के भार मे आंशिक रूप से कमी हो रही है, इसके बाद बर्तन से निकले पानी के भार को मापा तो पाया कि बर्तन से निकले पानी का भार उतना ही था, जितना पानी मे डालने पर मुकुट के भार में कमी हुई थी।

फिर राजा द्वारा मुकुट बनाने के लिए दिए गए सोने के वजन के बराबर सोना उस बर्तन मे डाला और बर्तन से निकले उस पानी को भी एकत्रित कर लिया, फिर दोनों की तुलना करने पर पता चला कि सोनार द्वारा बनाए गए मुकुट मे मिलावट अधिक थी (चूंकि सोना चाहे किसी ठोस अवस्था में हो या मुकुट के रूप में, उसका घनत्व समान रहेगा, इसलिए वह अपने भार के बराबर ही पानी को विक्षेपित करेगा)।

अपनी इस शानदार खोज से खुश होकर वह यूनान की गलियों में ‘यूरेका यूरेका’ चिल्लाते हुए निकले, जिसका अर्थ होता है “मैंने पा लिया”, “मैंने पा लिया”। इस प्रकार उन्होंने इस सिद्धान्त को खोजा कि किसी द्रव मे डालने पर वस्तु के भार में जो आभासी कमी हुई वह वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होती है, चलिए अब हम इस सिद्धान्त को विस्तार से समझते हैं।

आर्किमिडीज़ का सिद्धान्त : Archimedes ka Siddhant / Law

आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त के अनुसार “जब कोई वस्तु किसी द्रव्य में आंशिक अथवा पूर्णरुप से डुबाई जाती है तो उसके भार में कमी का आभास होता है, वस्तु के भार में यह आभासी कमी उसके द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है।

उदाहरण के तौर पर जब हम एक बाल्टी को पानी के हौद में डालते हैं, तो पानी के अंदर भरी हुई बाल्टी हल्की रहती है और जैसे ही बाल्टी को पानी से बाहर निकालते हैं तब वह पहले की अपेक्षा अधिक भारी लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पानी के अंदर भरी हुई बाल्टी पर पानी द्वारा ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लग रहा होता है, जिससे बाल्टी हल्की हो जाती है।

आर्किमिडीज़ के इस सिद्धान्त को अच्छे से समझने के लिए सबसे पहले हमें घनत्व, उत्प्लावन/उत्छेप बल और प्लवन को समझना जरूरी है। चलिए अब हम इन्हें जान लेते हैं

घनत्व (Density)

किसी भी वस्तु का घनत्व उसके द्रव्यमान व आयतन के अनुपात पर निर्भर करता है। सामान्य भाषा में कहें तो, किसी पदार्थ के परमाणु जितना पास-पास रहेंगे उसका घनत्व व द्रव्यमान उतना ही अधिक होगा, तथा परमाणुओं के बीच की दूरी बढ़ने पर उसका घनत्व कम व आयतन बढ़ता जाता है।

घनत्व(d) = द्रव्यमान(m)/आयतन(V)

इस प्रकार घनत्व वस्तु के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाति तथा आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अर्थात् अगर वस्तु का आयतन स्थिर रहते हुए द्रव्यमान में वृद्धि होगी तो उसका घनत्व बढ़ेगा, तथा द्रव्यमान स्थिर रहते हुए आयतन में वृद्धि होगी तो उसका घनत्व कम होगा।

उदाहरण के तौर पर हमने 1 किलो रूई का एक गोला लिया जो कि एक क्रिकेट गेंद के आकार का है, फिर हमने उसे मशीन से धुनकर एक फुटबॉल के आकार का बना दिया, ऐसा करने पर हमने पाया कि रूई का भार दोनों परिस्थितियों मे समान था, लेकिन आयतन में वृद्धि हुई जिसके फलस्वरूप घनत्व में कमी हुई। यानी रूई पहले की अपेक्षा कम घनी रह गई।

आर्किमिडीज का सिद्धांत क्या है | आर्किमिडीज का सिद्धांत | Archimedes’ Principle in Hindi

उत्प्लावन/ उत्छेप बल : Utplawakta bal kya hai

जब किसी वस्तु को द्रव मे डुबोया जाता है तो उसके भार में आभासी कमी होती है, और वस्तु के डुबने की विपरीत दिशा में ऊपर की ओर द्रव द्वारा एक बल लगता है, जिसे उत्प्लावन अथवा उत्छेप बल कहते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वस्तु द्रव मे प्रवेश करते समय नीचे की ओर क्रिया बल लगाती है तथा द्रव भी इस बल पर प्रतिक्रिया के रूप मे इसके विपरित ऊपर की ओर बल लगाता है।

उत्प्लावन वस्तु के आयतन और द्रव के घनत्व पर निर्भर करता है। इस प्रकार जैसे-जैसे वस्तु का आयतन बढ़ेगा वह उतना ही अधिक द्रव को विस्थापित करेगा तथा जैसे-जैसे द्रव का घनत्व बढ़ेगा उसके द्वारा वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल भी बढ़ता जाएगा।

इसी वजह से मीठे पानी की नदियों/झीलों की बजाय समुद्र मे तैरना आसान होता है, क्योंकि समुन्द्र के पानी का घनत्व सोडियम क्लोराइड जैसी अशुद्धियां मिली होने के कारण अधिक होता है, जिसके फलस्वरूप शरीर पर उत्प्लावन बल अधिक लगता है, और हमें तैरने मे आसानी होती है।

ये भी पढिये 

प्लवन (Floatation)

किसी भी प्रकार की वस्तु के किसी द्रव पर तैरने की क्रिया को प्लवन कहते हैं। प्लवन की क्रिया वस्तु के भार एवं द्रव के उत्छेप बल पर निर्भर करता है।

कोई ठोस वस्तु पानी के ऊपर या पानी के अंदर तैरेगी अथवा डुब जाएगी ये निम्न बातों से तय होता है:-

  1. ठोस वस्तु का आयतन व घनत्व
  2. द्रव का घनत्व

माना किसी वस्तु का वायु मे भार व घनत्व = W1,d1

तथा द्रव का उत्प्लावन बल व घनत्व = W2,d2

(चूंकि उत्प्लावन बल (E) = वस्तु के भार में आभासी कमी = वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव का भार)

तैरने का नियम:

  1. जब W1>W2 या d1>d2 यहां ठोस वस्तु का भार व घनत्व द्रव के घनत्व व उत्प्लावन बल से अधिक है, इसलिए वस्तु डुब जाएगी। उदाहरण के लिए लोहे का गोला पानी के अंदर डुब जाता है।
  2. W1=W2 या d1=d2 यहां ठोस वस्तु का भार व घनत्व द्रव के घनत्व तथा उत्प्लावन बल के बराबर है, इसलिए वस्तु द्रव में आंशिक रूप से डुबकर तैरेगी। उदाहरण के लिए पानी के जहाज का कुछ हिस्सा पानी के अंदर रहता है।
  3. W2>W1 या d2>d1 यहां द्रव का घनत्व व उत्प्लावन बल ठोस वस्तु के भार तथा घनत्व से अधिक है इसलिए वस्तु द्रव के ऊपर तैरेगी। उदाहरण के लिए सूखी हुई लकड़ी का पानी के ऊपर तैरना।

इस प्रकार आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त का सूत्र (Archimedes Sutra) निम्न प्रकार से स्थापित होगा

हमने एक कमानीदार तुला लेकर उसके नीचे एक ठोस वस्तु को लटका देते है, और फिर उसे एक पानी से भरे बीकर में डालते हैं, तो हम पाएंगे कि वस्तु को पानी में डालते समय वस्तु के भार में कमी होती है, जिसे हम तुले के परिमाण मे देख सकते हैं। पानी से भरे बीकर मे ठोस वस्तु को डालने पर उसके द्वारा विस्थापित जल को हम एक दूसरे बीकर मे एकत्रित कर लेते हैं।

आर्किमिडीज़ सिद्धान्त के अनुसार वस्तु के भार में आभासी कमी = वस्तु के द्वारा हटाए गए द्रव का भार

इसे हम ऐसे समझते हैं, कि ठोस वस्तु का वायु में भार W1 तथा द्रव में डुबाने पर भार W2 हो, तब

द्रव में डुबाने पर वस्तु के भार मे आभासी कमी = (वस्तु का वायु में भार – वस्तु को द्रव में डुबाने पर भार) = W1-W2

यदि वस्तु को द्रव में डुबाने पर वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव का आयतन V तथा द्रव का घनत्व (Density) d हो, तब-

हटाए गए द्रव का द्रव्यमान (m) = घनत्व(d)×आयतन(V) = Vd      {चूंकि घनत्व(d) = द्रव्यमान(m)/आयतन(V)}

अब हटाए गए द्रव का भार = mg = vdg (यहां g गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है)

इस प्रकार वस्तु के भार में आभासी कमी (W1-W2) = Vdg

FAQs

Q1. आर्किमिडीज का सिद्धांत क्या है ?

उत्तर. जब कोई ठोस द्रव में पूरी तरह से डूब जाता है, तो उसका वजन कम हो जाता है, जो उस तरल के भार के बराबर होता है जिसे वह विस्थापित करता है।
स्पष्ट भार = वास्तविक भार−उत्प्लावन बल= mg−ρgV
जहाँ m = वस्तु का द्रव्यमान और = द्रव का घनत्व

Q2. उत्प्लावन बल किसे कहते हैं ?

उत्तर. जब किसी ठोस को किसी द्रव में पूरा या आंशिक रूप से डुबोया जाता है तो द्रव ठोस पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है जिसे उत्प्लावन बल या उछाल बल कहते हैं।

उत्प्लावन बल का मान द्रव में ठोस के डूबे हुए आयतन का मान, द्रव का घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण, इन तीनों के गुणनफल के बराबर होता है ।

उदाहरण :  जब आप सुबह नहाने जाते हैं तो पानी की वाल्टी में पड़े मग को पानी में डुबोने का प्रयास करे तो पानी मग पर उछाल बल लगाता है

Q3. आर्किमिडीज कौन थे?

उत्तर.आर्किमीडीज एक महान वैज्ञानिक, भौतिक विज्ञानी, गणितज्ञ और यूनान मे रहने वाले इंजीनियर थे। आर्किमीडीज एक महान आविष्कारक, अपने कार्य और आविष्कार के लिए सारे विश्व मे प्रसिद्ध है। वैज्ञानिक क्षेत्र मे उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है

उन्होने अपने जीवन मे 1) उत्प्लावकता का सिद्धांत 2) उत्तोलक का नियम और 3) आर्किमीडीज की स्क्रू मशीन की खोज की और उन्हे प्रयोग के माध्यम से सिद्ध किया।

Q4. गणित के ‘जनक’ कौन है?

उत्तर. आर्किमिडीज़ को गणित का जनक कहा जाता है जो प्राचीन काल का सबसे महान गणितज्ञ थे ।

Q5. आर्किमिडीज के सिद्धांत की खोज कैसे हुई?

उत्तर: आर्किमिडीज ने मुकुट के वजन के बराबर सोना और चांदी का एक द्रव्यमान लिया।उस आर्किमिडीज ने अपने सिद्धांत की खोज की जब उसने अपने बाथटब में पानी को ऊपर उठते देखा और वह “यूरेका (Eureka)!” चिल्लाते हुए नग्न होकर बाहर निकला।”मैंने इसे पाया है!” को कहानी का बाद का अलंकरण माना जाता है ।

Q6. आर्किमिडीज का सबसे बड़ा आविष्कार क्या था?

उत्तर:आर्किमिडीज अपने आविष्कारों और वैज्ञानिक खोजों के लिए प्रसिद्ध थे।इनमें से सबसे प्रसिद्ध थे आर्किमिडीज का पेंच (पानी जुटाने के लिए एक उपकरण जो आज भी फसल सिंचाई और सीवेज उपचार संयंत्रों में उपयोग किया जाता है) और आर्किमिडीज का उतप्लावन का सिद्धांत ।

आशा करते हैं Friends कि आपको हमारे द्वारा आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त पर लिखा गया Blog पसंद आया होगा। यदि हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो आप इसे अपने Friends व Social Media Sites पर Share ज़रूर करें।

यदि आपके मन में आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त से संबंधित कोई सवाल उठ रहा है तो आप Comment करके पूछ सकते हैं तथा भविष्य में ऐसी ही महत्वपूर्ण, ज्ञानवर्धक व रोचक जानकारियों के लिए हमारे Blog को follow कर सकते हैं, धन्यवाद।

Rate Now

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Pin It on Pinterest

Scroll to Top