mahatma gandhi anmol vachan in hindi

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 16 अनमोल विचार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जिन्हें प्यार से हम ‘बापू’ कहते हैं, महान सोच वाले एक साधारण व्यक्ति थे. वे करोड़ों देशवासियों के जीवन में बदलाव लाना चाहते थे. आज हमें जो आजादी हासिल है, उसके लिए राष्ट्रपिता ने बड़ी कुर्बानियां दी थीं.

वे सबके साथ मिलकर चलना चाहते थे. आज हम परिवार के अंदर बंट गए हैं, खुद को कंप्यूटर तक सीमित कर लिया है और स्मार्टफोन को अपनी दुनिया बना ली है.

इन जंजीरों से निकलने में बापू के विचार हमारे लिए मददगार साबित हो सकते हैं. गांधीजी जो कहते थे, वह करते थे

Mahatma Gandhi Anmol Vachan 2021

 

1. प्रार्थना सुबह की चाबी और शाम की सिटकनी है।

2. आजादी का कोई अर्थ नहीं है यदि इसमें गलतियां करने की आजादी शामिल न हों

3. डर शरीर का रोग नहीं है, यह आत्मा को मारता है।

4. कमजोर कभी माफ़ी नहीं मांगते। क्षमा करना तो ताकतवर व्यक्ति की विशेषता है।

5. जहाँ प्यार है, वहाँ जीवन है।

6. खुशियाँ तभी हैं जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, सामंजस्य में हों।

7. कमज़ोर कभी माफ नहीं कर सकते। क्षमा वीरो का आभूषण है।

8. उफनते तूफ़ान को मात देना है तो अधिक जोखिम उठाते हुए हमें पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ना होगा।

9. आपको इंसानियत पर कभी भी भरोसा नहीं तोडना चाहिए क्योंकि इस दुनिया में इंसानियत एक ऐसा समुद्र है जहाँ अगर कुछ बूँदें गंदी हो भी जाएँ तो भी समुद्र गंदा।

10. जिओ ऐसे कि जैसे कल ही मरने वाले हो। ओर सीखो ऐसे कि हमेशा जीने वाले हो।

11. कुछ ऐसा जीवन जियो जैसे की तुम कल मरने वाले हो, कुछ ऐसा सीखो जिससे कि तुम हमेशा के जीने वाले हो। 

12. एक राष्ट्र की संस्कृति, वहां के लोगो के दिल ओर आत्मा में बसती है।

13. किसी भी स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए सोने की बेड़ियां, लोहे की बेड़ियों से कम कठोर नहीं होगी। चुभन धातु में नहीं वरन् बेड़ियों में होती है।

14. गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती। वह तो केवल अपनी ख़ुशबू बिखेरता है। उसकी ख़ुशबू ही उसका संदेश है।

15. पहले वह आपकी उपेक्षा करेंगे, उसके बाद आपपे हसंगे, उसके बाद आपसे लड़ाई करेंगे, उसके बाद आप जीत जायेंगे।

16. संतुष्टि प्रयास में निहित है, प्राप्ति में नहीं। पूर्ण प्रयास ही पूर्ण जीत है।

17. निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी।

18. जब में सूर्यास्त और चन्द्रमा के सौंदर्य की प्रसंशा करता हूँ, मेरी आत्मा इसके निर्माता के पूजा के लिए विस्तृत हो उठती है। 

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