मकर संक्रांति पर निबंध

Essay on Makar Sankranti in Hindi l Makar Sankranti Par Nibandh For Students

                                                                                        (Paragraph, 10 Lines, anuched, Short , Lekh, Pdf)

Essay on Makar Sankranti in Hindi : दोस्तों आज हमने मकर संक्रांति पर निबंध  कक्षा (Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12 के विद्यार्थियों के लिए लिखा है. Get Some Essay on Makar Sankranti in Hindi For Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11 & 12 Students.

— मकर संक्रांति पर निबंध [800 Word] —

प्रस्तावना :  भारत का एक फसल त्योहार है जो की पूरे भारत में धूम धाम से मनाया जाता है। संक्रांति शब्द ‘संक्रमान’ कहते थे, जिसका अर्थ होता है ‘परिवर्तन परन्तु इसे पूरे भारत में ‘मकर संक्रांति’ ही कहा जाता है, क्योंकि उस दिन सूर्य देव ‘मकर राशि’ में प्रवेश करता है।

मकर संक्रांति का त्योहार, सूर्य के उत्तरायन होने पर मनाया जाता है। इस पर्व की विशेष बात यह है कि यह अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों पर नहीं, बल्कि हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायन होकर मकर रेखा से गुजरता है। यह पर्व हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है।

मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है

इस त्यौहार को भारत में मनाने के पीछे कई सारी मान्यता हैं| ऐसा कहा जाता है की इस दिन विष्णु भगवान ने देवताओं और असुरुओं के बीच युद्ध समाप्त कर दिया था जो की हजार वर्षों से चल रहा था। इसलिए लोगो के लिए यह बुराई का अंत और सच्चाई के युग की शुरुआत का महोत्सव है।

Or

इसके अलावा एक और विश्वास यह है कि भीष्म को अपने पिता से एक वरदान मिला था कि जब वह अपने प्राण त्यागना चाहेंगे केवल तभी मर पाएंगे, इसी दिन उन्होंने अपने नश्वर रूप को त्यागने का फैसला लिया था। इसलिए यह अत्यंत शुभ दिन मन जाता है और यही इस त्यौहार का महत्त्व है|

Or

महाभारत में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही माघ शुक्ल अष्टमी के दिन स्वेच्छा से शरीर का परित्याग किया था। उनका श्राद्ध संस्कार भी सूर्य की उत्तरायण गति में हुआ था। फलतः आज तक पितरों की प्रसन्नता के लिए तिल अर्घ्य एवं जल तर्पण की प्रथा मकर संक्रांति के अवसर पर प्रचलित है।

मकर संक्रांति पर क्या किया जाता है

इस दिन जहां तिल, गुड़ के पकवानों का आनंद लिया जाता है वहीं स्नान का भी विशेष महत्व होता है. इस दिन कहीं पतंग उड़ाई जाती हैं तो कहीं खिचड़ी बनाकर खाने का रिवाज है. मकर संक्रांति के त्यौहार को इसलिए इतने व्यापक स्तर पर मनाया जाता है क्योंकि यह एक खास पर्व है. किसी न किसी रूप में पूरे देश में इस दिन को अपनी-अपनी मान्यताओं के हिसाब से लोग सेलिब्रेट करते हैं.

मकर संक्रांति से विभिन्न तर्क जुड़े हुए हैं कहा जाता है कि यदि इस दिन जो व्यक्ति पवित्र नदी जैसे-गंगा, यमुना आदि नदी में स्नान करते हैं उसके सभी पाप नाश हो जाते हैं साथ ही साथ इस दिन दान करने का भी अपना अलग महत्व है।

मकर संक्रांति के दिन क्‍यों उड़ाते हैं पतंग

भारत में मनाएं जाने गर त्यौहार के पीछे कोई न कोई मान्यताएं व परंपराएं हैं. जिस तरह से दिवाली पर पटाखें जलाना, होली पर रंग खेलना. ठीक इसी तरह से मकर संक्रांति पर भी पतंगे उड़ाने की परंपरा है.

हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं अपितु मनोवैज्ञानिक पक्ष है. गुजरात व सौराष्‍ट्र में मकर संक्रांति के त्‍यौहार पर कई दिनों की लंबी छुट्टियां होती हैं. यहीं इस त्‍यौहार को भारत के किसी भी अन्‍य राज्‍य की तुलना में अधिक हर्षोल्‍लास से मनाया जाता है.

अपने दोस्तों को करिये अलग अंदाज़ में मकर संक्रांति विशे

मकर संक्रांति पर दान और स्नान का महत्व

मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त में स्नान-दान और पुण्य के शुभ समय का विशेष महत्व होता है.

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुड़ और तिल लगाकर नर्मदा में स्नान करना लाभदायी होता है. इसके बाद दान संक्रांति में गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से लाभ मिलता है और पुण्यफल की प्राप्ति होती है.

भारत के अलग-अलग राज्यों में इस तरह से मनाई जाती है मकर संक्रांति

उत्तर प्रदेश : मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व कहा जाता है. सूर्य की पूजा की जाती है. चावल और दाल की खिचड़ी खाई और दान में दी जाती है.

गुजरात और राजस्थान : उत्तरायण पर्व के रूप में मनाया जाता है. पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है.

आंध्रप्रदेश : संक्रांति के नाम से तीन दिन का पर्व मनाया जाता है.

तमिलनाडु : किसानों का ये प्रमुख पर्व पोंगल के नाम से मनाया जाता है. घी में दाल-चावल की खिचड़ी पकाई और खिलाई जाती है.

महाराष्ट्र : लोग गजक और तिल के लड्डू खाते हैं और एक दूसरे को भेंट देकर शुभकामनाएं देते हैं.

पश्चिम बंगाल : हुगली नदी पर गंगा सागर मेले का आयोजन किया जाता है.

असम : भोगली बिहू के नाम से इस पर्व को मनाया जाता है.

पंजाब : एक दिन पूर्व लोहड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है. धूमधाम के साथ समारोहों का आयोजन किया जाता है.

निष्कर्ष : मकर सक्रांति एक बहुत ही गतिविधियों से मिलकर बना त्यौहार है जिसमें ना सिर्फ मनोरंजन बल्कि पाठ पूजा का भी अपना अलग महत्व है साथ ही साथ भारतीय संस्कृति से आजकल की पीढ़ी को मिलवाना भी इस त्यौहार द्वारा सफल हो पाता है।

मकर संक्रांति पर दान करने के बहाने से ही कितने ही जरूरतमंदों की पूर्ति हो पाती है अतः यह बहुत ही प्यार और उमंग से भरा त्यौहार होता है।

ये भी पढिये : 

Leave a Comment