स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ पर निबंध

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Swadeshi Apnao Desh Bachao Essay in Hindi : दोस्तों आज हमने स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12 के विद्यार्थियों के लिए लिखा है. videshi bhagao swadeshi apnao

Swadeshi Apnao Desh Bachao In Hindi स्वदेशी अपनाओं देश बचाओं निबंध: आज से तकरीबन एक सौ वर्ष पहले भारत में स्वदेशी आंदोलन की नीव रखी गई थी. जब भारत के लोगों ने ब्रिटिश में बने माल का विरोध करते हुए भारतीय माल खरीदने का एक अभियान चलाया था.

Swadeshi Apnao आंदोलन में महात्मा गांधी के बाद राजीव दीक्षित एवं अब बाबा रामदेव इस मुहीम के हिस्सा बने हुए हैं. किसी भी देश की तरक्की उनके व्यापार से जुडी होती हैं. फिर भारत के बाजार विदेशी माल से भरे हो तो कैसे भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना देखा जा सकता हैं. Swadeshi Apnao In Hindi में हम इसी विषय पर विस्तार से जानेगे.

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स्वदेशी अपनाओं देश बचाओं निबंध (Nibanbh)

भारत का निवासी होने के नाते हम लोगों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया था। विदेशी वस्त्रों और उत्पादों का बहिष्कार करने का एक प्रमुख कारण देश के घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना और देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करना था। विदेशी वस्त्रों और उत्पादों का भारत के विभिन्न राजनेताओं ने समय-समय पर विरोध किया है ।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय महात्मा गांधी जी ने भी एक नारा जोरों से दिया विदेशी भगाओ स्वदेशी अपनाओ। इस नारे का अर्थ यह था कि विदेश में बन रहे उत्पादों का प्रयोग कम कर देश के घरेलू उद्योगों में बने पदार्थों का अधिक उपयोग कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाओ।

आधुनिक युग में हम सभी लोग समाज में अपने महत्व को सताने के लिए एक से एक महंगे वस्त्र पहनते हैं जिनमें से लगभग 80% वस्त्र विदेशी होते हैं। लेकिन इन वस्त्रों के अधिक उपयोग से हम अपने देशी भाइयों के रोजगार को छीन रहे हैं और अपनी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने में योगदान दे रहे हैं।  

हम लोगों को विदेशी उत्पादों का बहिष्कार कर देसी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए क्योंकि इससे ना केवल हमारे देसी भाइयों का कारोबार बढ़ेगा बल्कि इससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। विदेशी भगाओ स्वदेशी अपनाओ भारत वे बने उत्पादों का प्रसार होगा जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और हमारा देश विकास की ओर अग्रसर होगा।

दुनिया में सबसे बड़ी फ़ौज सोवियत संघ के पास थी ,जिसका खर्चा वह भारत जैसे देशो को मनमाने दाम पर हथियार बेच कर उठाता था ,परन्तु जब अमेरिका और फ़्रांस उससे बहुत कम कीमत में उनसे अच्छा हथियार बेचने लगे तो सोवियत का बाजार टूट गया और ९० के दसक आते आते वह अपने सेना का खर्च उठाने में असमर्थ हो गया .

परिणाम स्वरुप उसे अपने आधीन राष्ट्रों को आजादी देनी पड़ी इस प्रकार सोवियत संघ का पतन हो गया .चीन के पास भी बहुत बड़ी सेना है, और उसे भी अपने सैनिको का खर्च उठाने के लिए अपना सामान अन्य देशो के बाजार में भेजना पड़ रहा है और यहाँ तक उसे अपने कैदियों के अंगो को भी बेच कर पैसा कमाना पड़ रहा है .

लगभग रोज चीन भारतीय सीमा में घुस आता है, परन्तु वह बियात्नाम युद्ध के बाद इस स्थिति में नहीं है की कोई बड़ी लड़ाई लड़ सके, यदि चीन को बिना एक गोलीचलाये सबक सिखाना है तो सबसे अच्छा तरीका यही है की हर भारतीय चीनी सामानों का बहिस्कार करे, क्योकि दुनिया का सबसे बड़ा बाजार भारत है ,कोई भी देश से यदि इतना बड़ा बाजार छीन जाये तो उसका आधा पतन ऐसे ही हो जाएगा.मै हर भारतीय से अनुरोध करता हु की वह चीनी सामान लेना बंद कर दे…!!

मेरी भारत की कल्पना

भारत खुद में एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। विभिन्न जातियों और धर्मों के लोग इस देश में शांति से रहते हैं। हालांकि ऐसे लोगों के कुछ समूह हैं जो अपने निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए लोगों को भड़काने की कोशिश करते हैं जिससे देश के शांति में बाधा आ जाती है। मेरे सपनों के भारत में इस तरह की विभाजनकारी प्रवृत्तियों की कोई जगह नहीं होगी। यह ऐसा स्थान होना चाहिए जहां विभिन्न जातीय समूह एक-दूसरे के साथ एकदम सही तालमेल में रहते हो।

मैं भारत को ऐसा देश होने का सपना देखता हूं जहां का हर नागरिक शिक्षित होगा। मैं चाहता हूं कि मेरे देश के लोग शिक्षा के महत्व को समझ सकें और यह सुनिश्चित करें कि उनके बच्चों को छोटी सी उम्र में नौकरी करने की बजाय शिक्षा हासिल करने का अधिकार मिले।

मैं चाहता हूं कि सरकार सभी के लिए समान रोजगार के अवसर प्रदान करे ताकि युवाओं को योग्य रोजगार मिल सके और राष्ट्र के विकास के लिए युवा अपना योगदान दे सकें। मैं चाहता हूं कि देश तकनीकी रूप से उन्नत हो और सभी क्षेत्रों में विकास हो सके। अन्त में, मैं चाहता हूं कि भारत एक ऐसा देश हो जहां महिलाओं को सम्मान दिया जाता हो, उनके साथ सभ्य व्यवहार किया जाता हो और पुरुषों के रोज़गार के समान अवसर दिए जाते हो।

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