बारिश का सीजन मानसून (वर्षा ऋतु ) पर निबंध

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वर्षा ऋतु बड़ी सुहानी है, सब ऋतुओं की रानी है

देती हमको पानी है, ये तो जीवनदायिनी है !

वर्षा ऋतु पर निबंध : Varsha Ritu Par Nibandh (Essay) in Hindi

Varsha Ritu Par Nibandh (Essay) in Hindi

प्रस्तावना : मई की छुट्टियां खत्म होने के बाद हम सभी को अगर किसी का इंतजार होता है, तो वह है बारिश। भारत में बारिश का सीजन करीबन 3 से 4 महीनों तक चलता है।

भारतीय उप महाद्वीप के लोग बारिश को ‘मानसून‘ कहते है। विभिन्न देशों और विभिन्न प्रदेशों में बारिश के मौसम की एक विशिष्ट अवधि तय नहीं है। उष्ण कटिबंध वर्षा वनों में पूरे वर्ष भर बारिश होती है तो, सहारा जैसे रेगिस्तान में बहुत ही कम वर्षा होती है।

वर्षा कैसे होती है।

बारिश, हवा में जल और वाष्प के संघनन के कारण होती है। सूरज के किरणों की गर्मी धरती पर पानी का तापमान बढ़ा देती है। इसी कारण महासागरों और नदियों का पानी वाष्पित होने लगता है और वायुमंडल में बाष्प भरने लगता है।

वायुमंडल में बाष्प स्थापित होने के बाद यह बादल का रूप ले लेता है और कम दबाव का क्षेत्र प्रस्थापित हो जाता है। यह दबाव बादलों को महासागरों से धरती की ओर धकेलता है। धरती पर आते-आते बादल ठंडे पड़ते है और बारिश होने लगती है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवा भारत में भारी वर्षा का कारण बनती है। तो कभी-कभी बारिश तेज हवा, तूफान, बादलों के तेज गरजना, बिजली के साथ भी होती है।

वर्षा ऋतु का आनंद l 

मई की महीने में गर्मी से भला कौन परेशान नहीं होता है और इसी गर्मी को शांत करने का महत्वपूर्ण काम करती है बारिश। इसीलिए लोग पहली बारिश का बेसबरी से इंतजार करते है और बारिश होते ही इसके आनंद में फुला नहीं समा पाते है।

बारिश शुरू होते ही बारिश के लिए आवश्यक चीजें जैसे छत्री, रेनकोट, प्लास्टिक आदि की तैयारियों में सब जुट जाते हैं। किसान खेतों में बीज लगाने की तैयारी में जुट जाता है। साथ ही स्कूल में जाने वाले बच्चे अपनी नई कक्षा में दाखिल होने की तैयारी करते है।

लेकिन सच देखा जाए तो बारिश का असली मजा बारिश में भीगे बिना नहीं आता है। साथ में गरम चाय और पकोड़े बिना बारिश जैसे अधूरी ही मानी जाती है। बारिश अपने साथ कई सारे त्योहारों को भी लाता है।

वर्षा ऋतु का महत्व l 

हर साल हम मौसम विभाग से मानसून के पूर्वानुमान का इंतजार करते है, की आखिर बारिश कब होगी। मानसून की खबरें मिलते ही, सभी का दिल खुशी से झूम उठता है।

बारिश के इन 4 महीनों के दौरान भू जल को फिर से भरा जाता है। कुएं, झील, तालाब, जलाशय बारिश के पानी से भर जाते है। बिना बारिश के यह धरती सुख जाएगी और बंजर रेगिस्तान बन जाएगी।

भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ पर होने वाली खेती मुख्य रूप से हर वर्ष होने वाली बारिश पर निर्भर करती है। किसानों के लिए बारिश का महत्व अनन्य साधारण है। खेत में भरपूर फसल उगना हर किसान के लिए बारिश के वरदान से कम नहीं है।

बारिश होते ही, गर्मी के मौसम में सुखी हुई जमीन नर्म हो जाती है। जिससे उसकी खुदाई करना और बीज बोना किसान के लिए आसान हो जाता है। बीज बोने के बाद मिलने वाली प्राकृतिक बारिश फसल को उगाने और बढ़ने में मदद करती है।

हालांकि की बारिश के मौसम में खेत में अच्छा उत्पादन मिलता है। लेकिन यही बारिश जब बाढ़ का रूप ले लेती है, फसलें पानी के नीचे आ जाती है और किसानों को भारी नुकसान का सामना भी करना पड़ता है।

बारिश का मौसम शुरू होते ही, नदियाँ और झरने फिर से बहने लगते है। सूखे तालाब और जलाशय फिर से भर जाते है। भू जल की निचतम मात्रा फिर से बढ़ जाती है, जिससे बारिश के बाद पानी उपलब्ध होता है।

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वर्षा ऋतु में आने वाली समस्याएं।

मानसून जितना सुहाना लगता है, यह अपने साथ कई सारी भयानक चीजें भी लाता है। अक्सर हमें बारिश केआनंद के साथ कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है।

शहरों में बारिश की वजह से होने वाली समस्याएं अधिक है। भारी बारिश शहर की नालियों को चोक कर देती है। हमारे देश में ड्रेनेज सिस्टम बारिश के पानी को पूरी तरह से खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

पानी के जमाव के कारण रेलवे रास्ते, सड़क पर पानी जमा हो जाता है, जिससे इन रास्तों को बंद करना ही पड़ता है। और इसका नतीजा अन्य रास्तों पर ट्रैफिक जाम, भीड़ में दिखाई देता है। भारी ट्रैफिक के कारण लोग एक जगह से हिल भी नहीं पाते है।

कई बार खबरों में हम सुनते है की रास्तों पर पानी जमा होने की वजह से पूरा शहर बंद करने की नौबत आ जाती है। जमे हुए पानी के कारण लोगों को रास्ते अच्छे से नजर नहीं आते, और कई लोग इसी पानी के जमाव में बह जाते है। ट्रैफिक में अपनी कार में फंसे हुए लोग एक जगह से न निकलने पर अपनी जान खो बैठते है।

ज्यादा बारिश के कारण नदियां और झील अपने किनारों की सीमा का उल्लंघन करती है। जिस कारण किनारों पर स्थित गांव और बस्तियाँ पानी से भर जाती है। बाढ़ की स्थिति गरीब लोगों के जीवन को बिगाड़ कर रख देती है।

जरूरत से ज्यादा बारिश उगी हुई फसल को पानी के नीचे बहा देती है। कभी-कभी मौसम से परे होने वाली बारिश अच्छे से उगी हुई फसल को भी बर्बाद कर देती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।

मनुष्य की कृति का बारिश पर असर।

मनुष्य की अनेक गतिविधियों का बारिश के चक्र पर बुरा असर पड़ता है। इंसानों द्वारा की गई जंगल की कटाई इसका मुख्य कारण है। एक क्षेत्र में कटी हुई जंगल की कटाई दूसरे क्षेत्र में कम बारिश का कारण बनती है।

जंगल और पेड़ बारिश के गिरने के लिए महत्वपूर्ण है, और इन जंगलों का नष्ट होना बारिश की कमी का कारण है।

जीवाश्म ईंधन के जलने से पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे वाष्पीकरण और बर्फ पिघलने या जल चक्र की अन्य प्रक्रियाओं पर विपरीत परिणाम करती है।

उपसंहार : 

जीवन में आने वाली हर चीज की तरह उचित समय पर होने वाली बारिश का स्वागत ही किया जाता है। हालांकि बारिश का उचित मात्रा का होना आवश्यक है। ज्यादा बारिश बाढ़ की वजह बनता है, तो कम बारिश अकाल का कारण, किसी भी हालात में दोनों भी नुकसानदायक ही है।

पर्याप्त वर्षा अच्छी फसल को सुनिश्चित करती है, तो देर से बारिश होने पर इसका बुरा प्रभाव पेड़, पौधों और फसल पर होता है। मानसून अगर ज्यादा समय तक जारी रहे, तो यह कई सारी बीमारियों को निमंत्रण भी देता है।

बारिश एक नैसर्गिक बदलाव होने पर भी मनुष्य की कुछ गतिविधियों का इसपर बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन इसके विपरीत परिणामों का सामना भी इंसान को ही करना पड़ता है।

Varsha Ritu Par Nibandh (Essay) in Hindi

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