गोलकोण्डा किले का इतिहास और उससे जुडी कुछ रोचक जानकारी

दोस्तों, भारत अपने इतिहास और भूगोल के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। भारत में बहुत से किले और महल है जो कि अपने इतिहास के लिया विश्व में प्रसिद्ध है। आज हम भारत के एक ऐसे किले का इतिहास आपके लिये लेकर आये है। जिसका नाम है गोलकोण्डा किला।

यह किला दक्षिणी भारत में, हैदराबाद से 5 मील दूर पश्चिम में स्थित है। यह किला सूंदर व मनमोहक किला है। यह किला भारत के पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। गोलकोण्डा का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। गोल्ला का अर्थ है- गडरिया तथा कोण्डा का अर्थ है- पहाड़ी।

यह किला एक पहाड़ी पर बना हुआ है। कहा जाता है कि इस किले के निर्माण का सुझाव ककाटिया के राजा को एक गडरिया ने दिया था। इसलिए इस किले का नाम गोलकोण्डा पड़ा। गोलकोण्डा किले के दक्षिणी भाग में मुसी नाम की एक नदी बहती है।

गोलकोण्डा किले का इतिहास :  Golconda Fort History in Hindi

गोलकोण्डा किला मूल रूप से मनकल नाम से जाना जाता है। इस किले का निर्माण ककाटिया द्वारा किया गया था। उन्होंने इसका निर्माण अपने कोंडापल्ली किले को पश्चिम से सुरक्षित करने के लिए किया था। गोलकोण्डा किले को ग्रेनाइट की पहाड़ी पर बनाया गया था।

जिसकी ऊँचाई लगभग 120 मीटर है। इस किले में बहुत से युद्ध हुए। जिस कारण ये काफी छतिग्रस्त हो गया था। फिर वहाँ की रानी रुद्रमा देवी ने इस किले का पुननिर्माण करवाया था। तथा उनके उत्तराधिकारी प्रतापरुद्र ने इसे मजबूत करवाया था।

कुछ समय बाद इस किले पर मुसुनीरी नायकों ने अपना अधिकार कर लिया। उन्होंने तुगलकी सेना को वारंगल में हराया। सन 1364 ईस्वी में हुई एक संधि में मुसुनुरी कपय भूपति ने यह किला बहमनी सल्तनत को दे दिया।

जब यह किला बहमनी सल्तनत के अधिकार में आया तब से गोलकोंडा का विकास होने लगा। तथा उसकी सीमा बढ़ने लगी। उस समय तेलंगाना में एक गवर्नर को भेजा गया। जिसका नाम सुल्तान कुली कुतुब-उल-मुलक था। उन्होंने सन 1501 ईस्वी में गोलकोण्डा किले को अपनी सरकार की सीट बना ली। जिससे बहमनी शासन कमजोर हो गया और हार गये।

उस समय कुल 5 सुल्तान थे। जो आजाद हुए थे। जिसमें से सुल्तान कुली कुतुब-उल-मुलक एक थे। सन 1538 में सुल्तान कुली ने स्वतंत्र रूप से गोलकोंडा पर अपना अधिकार हासिल कर लिया व इस किले पर कुतुबशाही राजवंश का शासन स्थापित किया।

इस राजवंश के शासकों ने यहां 62 वर्ष तक शासन किया। उन्होंने इस किले का निर्माण उस तरह करवाया। जैसा की यह अभी बना हुआ है। उन्होंने इस किले की परिधि को 5 किलोमीटर तक और फैला दिया तथा इस पर ग्रेनाइट से पुरे किले की किलाबंदी करवाई गयी। इस किले को अधिक सुरक्षित किया गया। उन्होंने इसे अपनी राजधानी घोषित की।

सन 1590 तक इस किले को कुतुबशाही राजवंश के शासकों ने अपनी राजधानी बनाये रखी। लेकिन इसके बाद उन्होंने अपनी राजधानी को हैदराबाद को बना लिया। कुतुबशाहियों ने इस किले कि सीमा को 7 किलोमीटर तक और बढ़ा दिया। उन्होंने पुरे शहर में दीवारों की घेराबंदी कर दी। सन 1667 में मुग़ल शासक औरंगजेब ने इस किले पर हमला किया और इसे जीत कर इसे लूट लिया। इसके बाद यह किला पूरी तरह से बर्बाद हो गया।

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गोलकोण्डा किले की संरचना : Golconda Fort Architecture

गोलकोण्डा किले का इतिहास: Golconda Fort History in Hindi

गोलकोण्डा किला बहुत ही अद्भुत संरचना से बना हुआ है। यहां बहुत से महल व मस्जिद बनी हुई है। इस किले की बाहरी दीवार 10 किलोमीटर लम्बी है। इस दिवार के सहारे 4 दुर्ग खड़े है।

इन दुर्गो में 87 अर्धसूत्रीय बुर्ज बने हुए है। यहां 8 प्रवेश द्वार व 4 उठाऊ पुल है। इस किले के अंदर कई शाही महल, मंदिर, मस्जिद, और अस्तबल मौजूद है। जो इसे बहुत ही आकर्षक बनाते है।

Golconda kile ke Darwaje ke Naam

इस किले के सबसे निचले भाग की तरफ एक दरवाजा है। जो “फतह दरवाजा” नाम से जाना जाता है। इस दरवाजा को “विजय दरवाजा” भी कहा जाता था। वैसे तो किले में प्रवेश करने के लिये 8 द्वार है। लेकिन इसका मुख्य प्रवेश द्वार बाला हिसार गेट है। इस गेट पर मोर-मोरनी व शेर-शेरनी की आकृतियां आपको जरूर आकर्षित करेगी। यहां पर चक्र की आकृतियां बनी हुई है।

जादुई ध्वनि

गोलकोण्डा किला वैसे तो अपने इतिहास व आकृति के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। लेकिन इसके साथ-साथ यहां कुछ ऐसी चीज़े भी देखी जाती है। जो आज भी सभी को अपनी और आकर्षित करती है।

जी हाँ दोस्तों, यह किला अपनी जादुई ध्वनि के लिये भी जाना जाता है। यहां आप तालियों के ध्वनि करे तो आपको एक अलग ही प्रकार की ध्वनि सुनाई देगी।

यह तालियों की मंडप नाम से प्रसिद्ध है। यहां प्रजा अपने राजा के पास अपनी फरियाद लेकर आती थी। इस किले की सबसे ऊँची जगह “बाला हिसार” है। जो यहां से कुछ दुरी पर स्थित है। यहां पर आपको काफी आकृतिया भी देखने को मिल सकती है। Golconda Fort History in Hindi

जल व्यवस्था

गोलकोण्डा किले के अधिक ऊँची पहाड़ी पर होने के कारण यहां जल पंहुचा पाना बहुत ही मुश्किल है। इस समस्या से निपटने के लिए इस किले के निर्माता ने जल को संचय व इकठा करने और प्रवाह के लिए एक प्रकार की विशेष तकनीक का उपयोग किया है। उन्होंने पानी को पहुंचने के लिए टेरीकोटा के पाइपों का उपयोग किया था।

इससे यह पता चलता है कि उस समय भी काफी तकनीक विकसित हो चुकी थी। उस समय भी विज्ञान को महत्व दिया जाता था। लेकिन अब महल के इस हिस्से में जाने की अनुमति किसी को भी नहीं है। अब यह किला पूरी तरह से खण्डहर बन चुका है। Golconda Fort History in Hindi

कोहिनूर के लिए प्रसिद्ध

गोलकोण्डा किले को गुफाओं का किला भी कहा जाता है। क्योंकि यहां काफी गुफाए थी। जिसमें से काफी बेशकीमती हिरे व जवाहरात निकले थे। यहां हीरे की काफी बड़ी और विख्यात खदाने थी। यहां पर काफी बेशकीमती खजाने व हीरे मिले। जिनका अपना ही एक इतिहास है। जिनमे से कुछ प्रमुख ये है-

  • दारिया-ए-नूर
  • नूर-उल-ऐन
  • कोह-ए-नूर
  • उम्मीद-ए-डायमंड
  • प्रिंस डायमंड
  • रीजेंट डायमंड

इनमें इस एक सबसे प्रसिद्ध हीरा है- कोहिनूर का हीरा। कोहिनूर का हीरा, गोलकोण्डा के किले से सम्बन्ध रखता है। कोहिनूर का हीरा, बेशकीमती हीरों में से एक है।

यह हीरा अंग्रेज अपने साथ लन्दन ले गए। उस समय इस हीरे ने वहाँ की राजकुमारी एलिजाबेथ के ताज की शोभा बढ़ाई। अब यह हीरा लन्दन में बहुत अधिक सुरक्षा में रखा हुआ है।

यह भी भारत की सम्पति है। जिसे अंग्रेज लूटकर ले गए। Golconda Fort गोलकोण्डा में विश्व प्रसिद्ध हीरे जवाहरातों का एक बाजार लगता था। जो पुरे विश्व में प्रसिद्ध था। दूर-दूर से लोग इसे देखने आते थे व यहां से बेशकीमती हीरे ले जाते थे। हमले के बाद ये खदाने पूरी तरह से नष्ट हो गयी और वह बाजार पूरी तरह से ख़त्म हो गया।

गोलकोण्डा के प्रमुख स्थान

गोलकोण्डा किले में प्रवेश करते ही आपको इसकी मजबूत दीवारें दिखाई देगी। ये दिवारें बहुत ही मजबूत व बड़ी है। जिसके दोनों तरफ से घेर कर बीच में एक गलियारा है। इन दीवारो पर सैनिक सुरक्षा के लिए तैनात रहा करते थे। ये दीवारें बहुत ही मजबूत है। मुगल शासकों की तोपें भी इन दीवारों का कुछ नहीं बिगाड़ पायी।

जब आप यहां से आगे जाएंगे तो आपको यहां प्राचीन नक्काशी दिखाई देगी। जो हिन्दू-कला को प्रदर्शित करटी है। इस किले में प्रवेश करने के बाद आपको बहुत से महल दिखाई देंगे। जो अब काफी हद तक खण्डहर बन चुके है। यहां पर और भी काफी देखने लायक जगह है।

जिनमें से हथियार-घर, हब्सी कॉमन्स, तारामती मस्जिद, ऊंट अस्तबल, नगीना बाग़, निजी कक्ष, मुर्दा स्नानघर, रामसास का कोठा, दरबार कक्ष व अम्बर खाना जैसे काफी देखने लायक स्थान है। जो इसके इतिहास का वर्णन करते है। Golconda Fort History in Hindi

गोलकोण्डा किले में प्रमुख स्थान

गोलकोण्डा किले में काफी चढ़ाई के बाद यहां एक मंदिर और मस्जिद है। जो काफी आकर्षित करते है। यहां पर महाकाली का विशाल मंदिर बना है। यहां से कुछ दुरी पर कुछ मकबरे भी मौजूद है। जो काफी टूट चुके है। उन्हें भी आप देख सकते है व यहां के बाग-बग़ीचे भी काफी आकर्षित करते है।

इसे शाही बाग़ भी कहते है। जिसे 4 शताब्दी पहले बनाया गया था। जो काफी सूंदर व मनमोहक है। इस किले में मुख्य रूप से 8 दरवाजे है। जो 3 मील लम्बी दीवार से इस किले को घेरे हुवे है।

तो दोस्तों, ये थी इस किले से जुड़ी कुछ बातें। अब हम आपको कुछ जानकारी देंगे जिसकी मदद से आप यह आसानी से घूम सकते है। जैसे कि आप वहां कैसे पहुंच सकते है? व वहां प्रवेश करने के लिए शुल्क है या नहीं ? जिससे आपको ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े। Golconda Fort

लाइट एंड साउंड शो

गोलकोण्डा किले का इतिहास: Golconda Fort History in Hindi

इस किले में शाम के समय में लाइट एंड साउंड का एक शो आयोजित होता है। जिसमें इस किले के इतिहास से जुडी घटनाओं को बताया जाता है। यह सूंदर व मनमोहक शो 1 घंटे तक चलता है। इसके लिए आपको कुछ शुल्क देना पड़ेगा। Golconda Fort

गोलकोण्डा किले का प्रवेश शुल्क

भारतीय15 रुपये
विदेशी पर्यटक200 रुपये
कैमरा शुल्क25 रुपये
लाइट एंड साउंड शो शुल्क130 रुपये
गोलकोण्डा किले में प्रवेश समय8:00 A.M. – 5:30 P.M
गोलकोण्डा किले में प्रवेश अवधि 1 – 3 घण्टे

गोलकोण्डा किले का पता

खैर कॉम्प्लेक्स, इब्राहिम बाग, हैदराबाद, तेलंगाना 500008

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