तारागढ़ किला का इतिहास !

राजस्थान अपने परम्परा और इतिहास के लिए भारत ही नहीं पुरे विश्व में जाना जाता है। यह अपने बड़े बड़े किलो व बड़ी बड़ी इमारतों के लिया जाना जाता है।

यहाँ एक तरफ अरावली पर्वत शृंखला है तो दूसरी तरफ खुला रेगिस्तान जहाँ दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं देता। जी हाँ दोस्तों, हम अजमेर के तारागढ़ का किला के बारे में बात कर रहे है।

यहाँ बहुत से बड़े-बड़े राजाओं का जन्म हुआ है। राजस्थान को हमेशा से ही वीरो की भूमि कहाँ जाता है। यहाँ कई ऐसी घटनायें घटी है जो भारत के इतिहास के बहुत करीब है।

यहाँ बहुत सी ऎतिहासिक धरोहर है जिसे देखने के लिये देश विदेश के पर्यटक देखने आते है। तो अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए शुरू करते है।

तारागढ़ का किला

 

तारागढ़ का किला राजस्थान राज्य के अजमेर शहर में स्थित है। यह किला अरावली पर्वत श्रृंखला के एक पहाड़ी पर बना हुआ है। इस पहाड़ी का नाम नागपहाड़ी है। तारागढ़ का किला को बूंदी का किला भी कहा जाता है। तारागढ़ का किला 700 फिट की ऊँचाई पर बना हुआ है।

तारागढ़ का किला का इतिहास ।

तारागढ़ का किला का इतिहास कुछ खास नहीं है। यह किला बहुत ही प्राचीन किला है। इस किले का निर्माण सम्राट अजय पाल चौहान ने 11वीं शताब्दी में विदेशी या तुर्को के आक्रमण से अपनी रक्षा करने के लिया करवाया था।

तारागढ़ का किला 1426 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। इस किले के बहुत अधिक ऊंचाई पर होने के कारण रात के समय में यहाँ से तारे दिखाई देते है।

किले के निर्माण के कुछ समय पश्चात इस किले पर मेवाड़ का शासन हो गया। यहां के सम्राट कुंवर पृथ्वीराज ने अपनी रानी तारा के कहने पर इस किले का निर्माण पुनः करवाया था।

रानी तारा के नाम पर ही इस किले का नाम तारागढ़ का किला रखा गया था। राजस्थान के अन्य किलों की तरह यहां मुग़ल स्थापत्य कला का ज्यादा प्रभाव नहीं है। यह किला राजपूतानी स्थापत्य कला व भवन निर्माण कला से बनाया गया है।

तारागढ़ किले की संरचना

Taragarh Fort बहुत ही विशाल और बड़ा किला है। यह किला अरावली की पर्वत श्रंखला पर बनाया गया है। यह किला 1426 फ़ीट की ऊँचाई पर बनाया गया है। इस किले की एक तरफ गहरी घाटी है तथा दूसरी तरफ लगातार तीन पर्वत श्रृंखलाएं है। तारागढ़ का किला पहाड़ी की खड़ी ढलान पर बना हुआ है। इस किले में प्रवेश करने के लिए तीन मुख्य द्वार है।

1. लक्ष्मी पोल
2. फूटा दरवाजा
3. गागुड़ी का फाटक

यह तीनों द्वार अब खंडहर बन चुके है। तारागढ़ का किला में महल के हाथी पोल पर बने 2 हाथियों की मुर्तियां है। यह किला अपनी शिल्पकला एंव भित्ति चित्रों के कारण बहुत प्रसिद्ध है।

तारागढ़ का किला में बहुत सी सुरंगे बनी हुई है। यहाँ पर बहुत सी लड़ाइयां लड़ी गयी है। इस किले की सबसे बड़ी लड़ाई 16 शताब्दी में लड़ी गयी थी।

तारागढ़ में घूमने लायक स्थान

तारागढ़ का किला में बहुत से घूमने लायक सुंदर स्थान है। अगर आप घूमना पसंद करते है तो आपको यहाँ तारागढ़ का किला जरूर देखना चाहिय। तारागढ़ का किला में बहुत सी ऐसी चीज़े है जो आपको अपनी और आकर्षित करती है। इस किले में बहुत से सूंदर महल बने हुए है। जिनके नाम निम्न है:-

  • छत्रमहल
  • फुल महल
  • रतन महल
  • बादल महल
  • अनिरूद्ध महल

तारागढ़ का किला में एक बहुत बड़ी तोप रखी गयी है जिसका नाम है “गर्भ गुंजन” है। इस किले में एक बहुत सूंदर तालाब भी है। चौहान बुर्ज पर कुछ जलाशय भी बने हुए है जो पानी के कमी होने से बचने के लिए बनाये गए थे। इन जलाशयों को चटानो के आधार में बनाया गया है। तारागढ़ का किला में मिरन साहेब की दरगाह भी है।

गर्भ गुंजन:

गर्भ गुंजन, तारागढ़ का किला की एक बहुत बड़ी तोप थी जो शत्रुओ को हारने के लिए बनायीं गईं थी। यह तोप भीम बुर्ज पर आज भी रखी गयी है। यह एक विशाल तोप है। कहाँ जाता है की जब यह तोप चलती थी तो एक बहुत तेज़ गर्जन होती थी। इसलिए इस तोप का नाम गर्भ गुंजन रखा गया था। आज भी यह तोप यहां पर संरक्षित रखी गयी है।

तलाब:

Taragarh Fort अपने तलाब के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर पानी के तीन तालाब है जिसमे हमेंशा पानी रहता है। इसे इस विधि से बनाया गया था कि इसमें जालशयों में वर्षा जल को संरक्षित करके रखा जा सके व जब पानी की कमी हो जाये तब इनका उपयोग किया जा सके। यहां राजस्थान में पानी की कमी से बचने का सबसे अच्छा तरीका था जो काफी अच्छा साबित हुआ।

खंम्भों की छतरी:

Taragarh Fort में 84 खम्बो की एक छतरी है जो काफी सूंदर है। राव राजा अनिरूद्ध सिंह ने इस छतरी को बनाया था। उन्होंने इसका निर्माण धाबाई देवा के लिए 1683 में करवाया था। यह सूंदर छतरी 3 मंजिला बनी हुई है। इसे 84 खम्बो से बनाया गया है।

ये भी पढ़े :

जिब्राल्टर क्या है ?

Taragarh Fort को जिब्राल्टर भी कहा जाता है। जिब्राल्टर, यूरोप के दक्षिणी किनारे पर स्थित भूमध्य सागर के तट पर स्थित है। जिब्राल्टर एक स्वशासी ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र है।

यह क्षेत्र सम्पूर्ण ब्रिटेन के सशस्त्र बल का आधार है। यह एक बेहद ऐतिहासिक क्षेत्र है। यहाँ पर ब्रिटेन की नौ-सेना का भी महत्वपूर्ण आधार है।यह क्षेत्र पूर्णतः चट्टानी प्रायद्वीप से पूरी तरह से घिरा हुआ है।

यहाँ बहुत सी प्रकर्तिक गुफाएं भी बनी हुई है। तारागढ़ का किला भी जिब्राल्टर से काफी मेल खाता है।इसलिए तारागढ़ का किला को जिब्राल्टर के नाम से भी जाना जाता है।

तारागढ़ का किला बहुत ही सूंदर और आकर्षित है। यह किला राजस्थान की बहुमूल्य विरासत है जो हमें इतिहास से मिली है। तारागढ़ का किला बहुत ऊँचाई पर बना हुआ है।

आज यह किला अपने वजूद को खो रहा है। इस किले से आप पुरे अजमेर को देख सकते है व उसकी सुंदरता का आनद ले सकते है। इस किले को देखने की लिए देश-विदेश से पर्यटक आते है।

टिकट:

इस किले को घूमने के लिए आपको कुछ भी टिकट खरीदने की कोई जरुरत नहीं है आप यहां निशुल्क घूम सकते है

समय सीमा:

इस किले को घूमे में आपको 1से 2 घंटे तक लग सकते है इस किले में प्रवेश का कोई समय निर्धारित नहीं है आप यहां कभी भी आ सकते है

पता:

तारागढ़ किला, अजमेर

अगर आपके मन में तारागढ़ किले से सम्बंधित किसी भी प्रकार का प्रश्न है तो आप हमसें कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। हम आपके प्रश्न का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। आगे भी हम आपके लिए ऐसे ही उपयोगी आर्टिकल लाते रहेंगे।

अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिये। हमारें Blog को सब्सक्राइब भी कीजिये जिससे आपको हमारें नये आर्टिकल के आने की नोटिफिकेशन मिल जाएगी। आप हमारें Facebook Page को भी जरूर लाइक करें जिससे आपको लेटेस्ट पोस्ट की सूचना समय पर प्राप्त हो जाएगी।
धन्यवाद…

Rate Now

Leave a Comment