नई एजुकेशन पॉलिसी नई शिक्षा नीति

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हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने 1986 के बाद पहली बार भारत की एजुकेशन पॉलिसी में बदलाव किया है। यह बदलाव इसरो के पूर्व वैज्ञानिक कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में करा गया है।

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भारत की नई एजुकेशन पॉलिसी के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां बताने जा रहे हैं। इसके अलावा हम इस लेख में इस योजना को लाने का उद्देश्य भी बताने जा रहे हैं। यदि आप नई एजुकेशन पॉलिसी के बारे में सभी तरह की जानकारियां जानना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक पढ़ना बिल्कुल ना भूलें।

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी क्या है ?

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत स्कूलों और कॉलेजों में होने वाली शिक्षा की नीतियों को तैयार किया जाता है। इसी के तहत केंद्र सरकार नई एजुकेशन पॉलिसी 2020 को लेकर आई है।

इससे पहले 1968 और 1986 में भी दो बार एजुकेशन पॉलिसी आ चुकी है। नई एजुकेशन पॉलिसी की मदद से केंद्र सरकार भारत में शिक्षा के स्तर को वैश्विक स्तर तक लाना चाहती है।

पिछली एजुकेशन पॉलिसी में 10+2 के पैटर्न को अपनाया जाता था लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत 5+3+3+4 के नए पैटर्न को अब से अपनाया जाएगा। यह नई एजुकेशन पॉलिसी भाजपा सरकार के 2014 में जारी किए गए चुनावी घोषणा पत्र में शामिल थी।

नई एजुकेशन पॉलिसी 2020

नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत सरकार चाहती है कि देश में शिक्षा और शिक्षकों का स्तर उठ सके। इसी के तहत शिक्षक पात्रता टेस्ट (टीईटी) के स्वरूप को भी बदला गया है।

अभी तक टीईटी परीक्षा दो हिस्सो में बंटी हुई थी लेकिन अब स्कूली शिक्षा का स्ट्रक्चर चार हिस्सों में (फाउंडेशन, प्रीपेरेटरी, मिडल और सेकेंडरी) बंटने के बाद टीईटी के पैटर्न को भी उसी हिसाब से बदला जाएगा।

शिक्षकों की भर्ती के समय टीईटी या उनसे संबंधित विषयों में एनटीए टेस्ट स्कोर को भी चेक किया जा सकता है। इन सभी परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा किया जाएगा।

योजना का नामनेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020
किसने शुरू करी हैभारत सरकार
लाभार्थीभारत के नागरिक
योजना को शुरू करने का उद्देश्यइस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य शिक्षा का सार्वभौमीकरण करना है तथा भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है।
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नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का उद्देश्य

  • नई एजुकेशन पॉलिसी लाने का उद्देश्य देश के शिक्षा के स्तर को वैश्विक स्तर तक पहुंचाना है।
  • इस नई एजुकेशन पॉलिसी को लाने से पहले केंद्र सरकार ने पुरानी एजुकेशन पॉलिसी में काफी संशोधन किए हैं
  • जिससे कि बच्चे की पढ़ाई में सुधार आए और वह स्कूल में अच्छी शिक्षा ग्रहण करें।
  • इस नई एजुकेशन पॉलिसी की मदद से सरकार चाहती है कि बच्चे अंको के खेल में ना फंस कर स्कूल में प्रैक्टिकल ज्ञान ले ताकि उन्हें भविष्य में नौकरी मिलने में दिक्कत ना हो।

नई एजुकेशन पॉलिसी की मुख्य विशेषताएं

  • इस नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया
  • पुरानी एजुकेशन पॉलिसी में 10+2 के पैटर्न को फॉलो किया जाता था लेकिन नई एजुकेशन पॉलिसी में 5+3+3+4 के पैटर्न को फॉलो किया जाएगा।
  • बच्चों को शुरुआत से ही प्रैक्टिकल जानकारी देने के लिए छठवीं कक्षा से ही इंटर्नशिप शुरू करा दी जाएगी।
  • पांचवी कक्षा तक की शिक्षा मातृभाषा में ही पढ़ाई जाएगी।
  • पहले साइंस कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम हुआ करती थी लेकिन अब इन स्ट्रीम को हटा दिया गया है। बच्चा अब कोई भी विषय अपनी पसंद के अनुसार चुन सकता है।
  • बच्चों को कक्षा 6 से ही कोडिंग की जानकारी दे दी जाएगी।
  • सभी स्कूलों में वर्चुअल लैब डिवेलप करी जाएगी।
  • इस नई एजुकेशन पॉलिसी का उद्देश्य पुस्तको पर निर्भरता कम करके ई लर्निंग पर अधिक जोर देने पर है।

नई शिक्षा नीति के फायदे

  • नई एजुकेशन पॉलिसी को सही रूप देने के लिए जीडीपी का 6% हिस्सा खर्च किया जाएगा।
  • बच्चों की पढ़ाई को सरल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • अगर कोई भी छात्र बीच में ही ग्रेजुएशन को छोड़ना चाहता है उसके लिए कई सारे एग्जिट ऑप्शन उपलब्ध होंगे जैसे 1 साल के बाद पढ़ाई छोड़ने के बाद उसे सर्टिफिकेट दिया जाएगा और 2 साल के बाद एडवांस डिप्लोमा दिया जाएगा।
  • हायर एजुकेशन में एमफिल की डिग्री को समाप्त किया जाएगा।
  • बच्चों को छठवीं क्लास से ही कोडिंग की नॉलेज दे दी जाएगी।
  • 2030 तक देश के हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना करी जाएगी।
  • छात्रों को स्कूलों में 3 भाषाओं का ज्ञान दिया जाएगा।
  • नई शिक्षा नीति के तहत अगर कोई छात्र किसी कोर्स को बीच में छोड़कर ब्रेक लेना चाहता है तो वह एक निश्चित समय तक ब्रेक लेकर वापस कोर्स को पूरा कर सकता है।
  • नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों की शिक्षा के अलावा उनके कौशल पर भी काफी ध्यान दिया जाएगा।

नई शिक्षा नीति के चार चरण

नई शिक्षा नीति को 5+3+3+4 के चार चरणों में विभाजित किया गया है। नई एजुकेशन पॉलिसी में 12 साल की स्कूली शिक्षा और 3 साल की प्री शिक्षा को शामिल किया गया है। इन चारों चरणों को प्राइवेट तथा सरकारी स्कूल दोनों को फॉलो करना होगा। नई शिक्षा नीति के चार चरण कुछ इस प्रकार से हैं।

फाउंडेशन स्टेज

नई शिक्षा नीति के फाउंडेशन स्टेज में 3 से 8 साल के बच्चों को शामिल किया गया है जिसमें 3 साल का प्रीस्कूल और 2 साल की स्कूली शिक्षा शामिल है।

प्रिप्रेटरी स्टेज

प्रिप्रेटरी स्टेज में 8 साल से लेकर 11 साल के बच्चों को शामिल किया जाएगा जो कि कक्षा 3 से 5 में हों। इस स्टेज में शिक्षकों का उद्देश्य बच्चों की संख्यात्मक कौशल का विकास करना रहेगा। इस स्टेज में बच्चों को उनकी क्षेत्रीय भाषा या मातृभाषा में पढ़ाया जाएगा।

मिडिल स्टेज

मिडिल स्टेज में कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों को शामिल किया जाएगा। कक्षा 6 से ही छात्रों को कोडिंग का ज्ञान दिया जाएगा तथा उन्हें इंटर्नशिप भी प्रदान करी जाएगी।

सेकेंडरी स्टेज

सेकेंडरी स्टेज में कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्र आएंगे। जैसा कि आप सभी को मालूम है पहले छात्र साइंस कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम में से कोई एक चुनाव करते थे लेकिन अब इन स्ट्रीम को हटा दिया गया है।

अब बच्चे अपनी रूचि के अनुसार कोई भी विषय ले सकते हैं जैसे कोई छात्र साइंस का सब्जेक्ट मैथ्स के साथ कॉमर्स का सब्जेक्ट अकाउंट्स ले सकता है।

केंद्र सरकार की और योजनाये 

दोस्तों इस लेख के माध्यम से हमने आपको भारत की नई एजुकेशन पॉलिसी के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां देने की कोशिश करी है। यह केंद्र सरकार द्वारा लाया गया एक क्रांतिकारी फैसला है।

अगर केंद्र सरकार इस योजना को सही ढंग से लागू कर देती है तो यह भारत के एजुकेशन सिस्टम में मील का पत्थर साबित होगा। अगर जैसे ही इस पॉलिसी के बारे में केंद्र सरकार कोई अपडेट जारी करेगी इस लेख के माध्यम से हम उस अपडेट को आपके पास पहुंचा देंगे इसीलिए हमारे साथ जुड़े रहें।

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