तनोट माता मंदिर का इतिहास और कहानी !

tanot mata mandir history in hindi

तनोट माता मंदिर के बारे में बहुत से लोग जानते होंगे, जो व्यक्ति ट्रेवल करते है या फिर जिन्हें एक जगह से दूसरी जगह घूमना पसंद है उन्हें तनोट माता के मंदिर के बारे में पता होगा लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी है जिन्हें इस मंदिर के बारे में पता नही होगा।

उनके लिए इस मंदिर का इतिहास जानना बहुत ही रोचक होगा तो आज में आपको आर्टिकल में तनोट माता मंदिर के बारे में सब कुछ बताऊँगा।

मै आपको इस मंदिर में बारे में वह सब कुछ बताऊँगा जो की बहुत कम लोग जानते होंगे और मेरा यह आर्टिकल पढ़ने के बाद आप भी यहाँ आने के लिए उत्सुक्त हो जाओगे। हम सभी जानते है कि भारत में बहुत से मंदिर है इसलिए इसको मंदिरों का स्थान भी कहा जाता है।

यहाँ के लोगों में जो मंदिरों और ईश्वर में श्रद्धा है वह देखने लायक है। भारत में बहुत ही चमत्कारी मंदिर है जिनमें लोगों का बहुत विश्वास है। आज हम आपको ऐसे ही शक्तिशाली मंदिर के बारे में बताने जा रहे जिसका नाम तनोट माता मंदिर है।

तो चलिये हम देख लेते है कि इस मंदिर का इतिहास क्या है और क्यों इस मंदिर को अधिक संख्या में लोग दूर-दूर से देखने आते है? तो चलिये शुरू करते है ।

तनोट माता मंदिर की कहानी । Tanot Mata Mandir ka Rahasya

तनोट माता मंदिर राजस्थान राज्य में स्थित है। यह मंदिर जैसलमेर से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर सीमा के निकट स्थित है।

यह करीब 1200 साल प्राचीन मंदिर है। जैसा कि मैंने आपको इस लेख की शुरुआत में भी बताया था कि भारत में बहुत से मंदिर है और सभी मंदिर अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। इसी प्रकार तनोट माता मंदिर में भी हमेशा से ही लोगों की आस्था व विश्वास रहा है।

लेकिन इस मंदिर ने अपना चमत्कार सन 1965 में दिखाया। उस समय भारत-पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था और उसी समय अपने कार्यों की वजह से यह मंदिर देश-विदेश में अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हो गया।

जब सन 1965 के सितंबर महीने में भारत-पाकिस्तान युद्ध प्रारम्भ हुआ तो पाकिस्तानी सेना ने पूरब में किशनगढ़ से 74 किलोमीटर दूर बुइली पर अपना कब्जा कर लिया था और पश्चिम में साधेवाला से शाहगढ़ तक अपना अधिकार कर लिया था।

और उत्तर में अछरी टीबा से 6 किलोमीटर दूर तक अपना के क्षेत्र पर अपना कब्जा कर लिया था तनोट माता मंदिर तीन दिशाओं से घिर चुका था। अब स्थिति ऐसी हो चुकी थी कि यदि पाकिस्तानी सेना इस मंदिर पर कब्जा कर ले तो वह रामगढ़ से लेकर शाहगढ़ तक के इलाके पर अपना अधिकार स्थापित कर सकता था। अब तनोट माता मंदिर पर अधिकार स्थापित करना भारत ओर पाकिस्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो गया था।

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पाकिस्तानी सेना ने 17-19 नवंबर 1965 को तीन अलग दिशाओं से तनोट माता मंदिर पर आक्रमण किया। पाकिस्तानी सेना का यह आक्रमण तोप के द्वारा किया था और तोपों के गोलों की बरसात तनोट माता मंदिर पर जो रही थी।

जवाब में तनोट माता के मंदिर की रक्षा के लिए मेज़र जय सिंह की कमांड में 13 ग्रेन्दिर की एक कम्पनी और सीमा सुरक्षा बल की 2 कंपनियां पाकिस्तान की पूरी ब्रिगेड का सामना कर रही थी।

जैसलमेर से Tanot Mata Temple जाने वाले मार्ग को घंटाली देवी मंदिर के पास एन्टी पर्सनल और एन्टी टैंक माइन्स लगाकर सप्लाई चैन को काट दिया था।

पकिस्तानी सेना ने फिर तनोट माता मंदिर को निशाना बनाया ओर इस मंदिर पर हजारों गोले दागे। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने इस मंदिर पर लगभग 3000 से भी ज्यादा बम गिराए लेकिन इस मंदिर पर खरोंच तक नही लगी।

यहाँ तक कि इस मंदिर के आँगन में गिरे लगभग 450 बम तो फटे तक नही। यह नजारा देख कर दोनों सेनाएँ आश्चर्यचकित थी। भारतीय सैनिकों ने मन की तनोट माता हमारें साथ है ओर वह हमारी रक्षा करेंगी।

कम संख्या में होनें के बाद भी भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को करारा जवाब दिया और उसके सैकड़ो सैनिकों को मार गिराया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने घुटने टेक दिए ओर भागने को मजबूर हो गए।

कहा जाता है कि तनोट माता ने सैनिकों के सपनें में आकर कहा था कि जब तक तुम सब मेरें मंदिर में हो, मैं तुम सभी की रक्षा करूँगी। सैनिकों की तनोट माता मंदिर की इस ऐतिहासिक जीत को देश के सभी अखबारों ने अपनी मुख्य खबर बनाया।

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद इस मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा, सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने ले लिया ओर यहाँ पर अपनी एक चौकी भी बना ली।

तनोट माता मंदिर की पूजा-अर्चना का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल ने लिया। वर्तमान में इस मंदिर का जिम्मा सीसुब की एक ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है।

भारत-पाकिस्तान युद्द में जो बम तनोट माता मंदिर पर गिरे थे वो आज भी यह मौजूद है। ये बम सक्रिय है और ये तनोट माता मंदिर के संग्रहालय में मौजूद है। जो भी भक्त यहाँ दर्शन करने आते है वो इन बमों को जरूर देखते है।

4 दिसंबर 1971 की रात को पाकिस्तान की पूरी टैंक रेजीमेन्ट ने “लोंगेवाला” पर हमला कर दिया था। लेकिन सीमा सुरक्षा बल और पंजाब रेजिमेंट ने तनोट माता की कृपा से एक बार फिर पाकिस्तानी टैंक रेजिमेंट को परास्त कर दिया था और “लोंगेवाला” में पाकिस्तानी टैंको का कब्रिस्तान बना दिया था

लोंगेवाला एक स्थान है जो भारत-पाकिस्तान की सीमा के समीप ही स्थित है ओर यह स्थान तनोट माता मंदिर के भी पास ही है। लोंगेवाला युद्ध में प्राप्त विजय के अवसर पर यहाँ पर मंदिर परिसर में एक विजय स्तम्भ का निर्माण किया गया था।

यहाँ पर हर साल 16 दिसंबर को जीत की खुशी में सैनिकों द्वारा उत्सव मनाया जाता है और युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

Tanot Mata को आवड़ माता के नाम से भी जाना जाता है और तनोट माता हिंगलाज माता का ही रूप है। हींगलाज माता का शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है।

यहाँ पर हर साल आश्विन ओर चेत्र नवरात्र में बहुत ही विशाल मेले का आयोजन किया जाता है और दूर-दराज इलाकों से श्रद्धालु यहाँ इस मेले में शामिल होने के लिए आते है। तनोट माता मंदिर अपनी प्रसिध्दि के कारण अब पर्यटन स्थल बन गया है।

तनोट माता मंदिर का इतिहास |

बहुत ही रोचक है और मैं आपको विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि मैं आपको इस आर्टिकल में तनोट माता मंदिर का जो इतिहास बताऊँगा उसको पढ़कर आपको मजा आ जाएगा। इसके लिए आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़िए तो चलिए शुरू करते है।

प्राचीन काल में बहुत पहले मामड़िया नाम के एक चारण थे ओर उनकी कोई संतान नही थी और संतान प्राप्ति की लालसा लेकर उन्होंने सात बार हिंगलाज शक्तिपीठ की पैदल यात्रा की।

तब एक बार हिंगलाज माता उनके सपने में आयी और पूछी कि तुम्हारी क्या इच्छा है तो मामड़िया ने कहा कि माता आप एक बार मेरे घर पर जन्म लें। माता ने उनको इच्छा पूर्ति का आशीर्वाद दे दिया ओर अंतर्ध्यान गयी।

बाद में माता की कृपा से चारण के घर 7 पुत्रियों और 1 पुत्र ने जन्म लिया। उन सभी पुत्र-पुत्रियों में से आवड़ माता प्रथम संतान थी जिन्होंने विक्रम संवत 808 में मामड़िया चारण के घर पर जन्म लिया।

बाल्यकाल से ही आवड़ माता ने अपना चमत्कार दिखाना शूरु कर दिया। चारण के घर जन्मी सातों पुत्रियां देवी स्वरूप थी और शक्ति का प्रतीक थी। उन्होंने हूणों के आक्रमण से माड़ प्रदेश की रक्षा भी की थी। 

Avad Mata

तनोट माता मंदिर की चौकी पर पिछले 4 साल से पदस्थ कॉन्स्टेबल कलिकांत सिन्हा ने कहा था कि तनोट माता मंदिर बहुत ही शक्तिशाली है और यहाँ मेरी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। उन्होंने कहा कि तनोट माता की कृपा सदैव हमारे ऊपर बनी रहती है। दुश्मन हमारा बाल भी बाँका नही कर सकता है।

कहा जाता है कि आवड़ माता की कृपा से यहाँ पर माड़ प्रदेश में भाटी राजपूतों का सुदृढ़ राज्य स्थापित हो गया था। राजा तणुराव भाटी ने माड़ प्रदेश को अपनी राजधानी बनाया और आवड़ माता को स्वर्ण सिंहासन भी भेंट किया। आवड़ माता ने अपने ही हाथों से विक्रम संवत 828 ईस्वी में अपने मंदिर की स्थापना की।

विक्रम संवत 999 में सातों बहनों ने राजा तणुराव के पोत्र सिद्ध देवराज, राजपूतों, चारणों, भक्तों, ब्राह्मणों और माड़ प्रदेश के अन्य लोगों को बुलाया और कहा कि आप सभी सुख-पूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहे है।

अब हमारें जन्म लेनें का उद्देश्य पूरा हुआ। यह कहकर सातों बहनें हिंगलाज माता मंदिर की और देखते हुए अदृश्य हो गईं। पहले तनोट माता के मन्दिर की पूजा-अर्चना साकल दीपी ब्राह्मण करते थे। 1965 के बाद से Tanot Mata Temple की पूजा सीसुब ट्रस्ट द्वारा नियुक्त पुजारी करता है।

तनोट माता मंदिर का पता

तनोट रोड़, तनोट, राजस्थान 345022

मंदिर में जाने का समय: 6.00 am – 8.00 pm

मैं आशा करता हूँ कि Tanot Mata Temple History के बारें में मैंने आपको जो कुछ बताया है वह आपको अच्छा लगा होगा। अगर आप Tanot जाना चाहते हैं तो आपको शीत ऋतु में वहाँ जाना चाहिए क्योंकि Tanot Mata Temple राजस्थान में स्थित है। राजस्थान एक गर्म प्रदेश है।

अगर आपके मन में Tanot Mata Temple History से सम्बंधित किसी भी प्रकार का Question है तो आप हमसें Comment के माध्यम से पूछ सकते है। हम आपके प्रश्न का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। आगे भी हम आपके लिए ऐसे ही उपयोगी आर्टिकल लाते रहेंगे।

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