जयपुर के आमेर किले का इतिहास !

राजस्थान अपनी ऐतिहासिक धरोहरों व ऐतिहासिक क़िलों के लिए जाना जाता है। यहां एक से बढ़कर एक ऐतिहासिक धरोहरें है। इन ऐतिहासिक धरोहरों में प्राचीन किले, मंदिर तथा महल है। इसी प्रकार राजस्थान में स्थित है

जयपुर शहर। जयपुर शहर अपनी विविधता व अपने इतिहास के लिए जाना जाता है। जयपुर में बहुत से ऐसे दर्शनीय स्थल है, जिन्हें देखने बहुत से पर्यटक यहाँ आते है।

जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल है। आज हम आपको ऐसी ही एक दार्शनिक स्थल के बारे में बतायेंगे। जिसका नाम है- आमेर का किला। तो चलिये दोस्तों शुरू करते है। 

Amer Fort | आमेर किला

आमेर का किला राजस्थान राज्य के जयपुर ज़िले में स्थित है। दरअसल आमेर का किला जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस किले का निर्माण कछवाहा राजा सवाई मान सिंह प्रथम ने सन 1727 ईस्वी में करवाया था। आमेर का यह किला बहुत ही सुंदर और आकर्षक है।

यह किला एक बहुत ऊँचे पहाड़ पर स्थित है। इसके निर्माण के समय यहाँ पर मीणाओं का शासन था। आमेर का किला, जयपुर का मुख्य पर्यटन केंद्र है। आमेर शहर को सन 967 ईस्वी में बसाया गया था।

आमेर के किले को “आम्बेर का किला” भी कहा जाता है। सन 1037 ईस्वी में राजपूतों के कच्छावा वंश ने आमेर शहर पर विजय प्राप्त की थी। सवाई मान सिंह प्रथम ने इस किले पर शासन किया।

आमेर का किला राजपूती कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस किले में अनेक फिल्मों की शूटिंग हुई है। आमेर का किला 3 तरफ़ से अरावली श्रंखलाओं घिरा हुआ है।

इस क़िले के चारों ओर ऊँची व मजबूत मोटी दीवारें दिखाई देती है। ये दीवारें 12 किलोमीटर दूर तक फैली हुई है। इन दीवारों को बनाने का एकमात्र उद्देश्य आमेर किले को सुरक्षित करना था। इसीलिये इन दीवारों का निर्माण किया गया। 

आमेर किले का इतिहास

कहते है कि वास्तव में आमेर किले का निर्माण सन 967 ईस्वी में राजा मान सिंह ने करवाया था। उनके बाद सवाई जय सिंह प्रथम ने भी आमेर किले पर बहुत अधिक समय तक शासन किया था।

इसके अलावा कईं लोगों का मानना है कि आमेर के किले का निर्माण सन 1589 में शुरू हुआ था, जो की सन 1727 ईस्वी में बनकर तैयार हुआ था।

आमेर के महल के निर्माण में उपयोग लिए गए रंगों को सब्जियों व पौधों से मिलकर बनाया गया है। ये रंग बहुत ही खूबसूरत है। इन रंगों की चमक आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है। आमेर का किला अपनी नक्काशी व कलात्मक चित्रों के लिए जाना जाता है। इस किले में हिन्दू शैली की छवि दिखाई देती है।

सन 2013 में कम्बोडिया के फ्नोम पेन्ह शहर में आयोजित हुए विश्व धरोहर समिति के 37वें सत्र में आमेर किले को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया था।

आमेर किले के बिल्कुल सामने की तरफ़ एक झील है। इस झील का नाम मावठा झील है। प्राचीन काल के समय आमेर शहर का जल स्रोत यही झील थी। यह झील बहुत ही खूबसूरत दिखाई देती है। जिससे आमेर के किले की सुंदरता में चार चांद लग जाते है।

आमेर किले की बनावट व संरचना

आमेर का किला एक ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है। आमेर का किला 4 स्तरों पर बना हुआ है। जिसमें से सभी स्तरों में बहुत बड़े-बड़े प्रांगण है। इन स्तरों में, दिवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, शीश महल और सुख निवास शामिल है। सुख निवास का वातावरण गर्मियों में भी शीतल रहता था और यह ठंडी हवा देता था।

हल में राजा का परिवार रहता था। इस किले के मुख्य प्रवेश द्वार के पास में कछवाहा वंश की आराध्य, शीला देवी का मंदिर बना हुआ है। सबसे ख़ास बात यह है कि आमेर का किला जिस पहाड़ी पर बना हुआ है, उसी पहाड़ी पर जयगढ़ का किला भी मौजूद है। ये दोनों किले एक रहस्यमयी पहाड़ी से एक-दूसरे से जुड़े हुए है।

आमेर का किला, जयपुर के उत्तर दिशा में स्थित है। इस शहर का क्षेत्रफल 4 वर्ग किलोमीटर में फैला है। प्राचीनकाल में यह शहर ढूंढाड़ के नाम से जाना जाता था। आमेर किले के सामने मौजूद मावठा झील के बीच में एक बग़ीचा है। इसका नाम केशर क्यारी बगीचा है। इसमें केशर की खेती की जाती है।

आमेर किले में बहुत से दर्शनीय स्थान मौजूद है। अगर आप आमेर घूमने जाना चाहते है तो आपको इन स्थानों को जरूर देखना चाहिए। चलिये आपको इन स्थानों के बारे में बताते है।

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Dil Aaram Baagh | दिल आराम बाग

Amber Fort के अंदर घुसते ही यह बाग दिखाई देता है। यह बाग मावठा झील के किनारें पर स्थित है। इस बाग का निर्माण 18वीं शताब्दी में किया गया था। इस बाग के दोनों तरफ़ छतरियां मौजूद है।

इस बाग के पूर्व व पश्चिमी किनारें पर फ़व्वारे लगे हुए है, जो इसकी सुंदरता को और अधिक बढ़ाते है। यह बगीचा देखने पर आँखों व दिल को बहुत सजकजन देता है, इसलिए इस बाग का नाम दिल आराम बाग रखा गया है।

Ganesh Pol | गणेश द्वार

Amber Fort का सबसे पहला द्वार ही गणेश द्वार के नाम से जाना जाता है। जज द्वार के ऊपर हिन्दू देवता गणेश जी की आकर्षक मूर्ति विराजमान है। इसका निर्माण सवाई जय सिंह ने करवाया था। आमेर किले में कुलसात प्रवेश द्वार है। गणेश द्वार, इन्हीं सात द्वारों में से एक है। गणेश द्वार से केवल राजा व शाही लोग ही प्रवेश कर सकते थे। विजय प्राप्त करने के बाद राजा इसी द्वार से किले में प्रवेश करते थे। उस समय रानियां उनके ऊपर फूलों की बारिश करती थी। Amer Fort History

Chand Pol | चाँद द्वार

चाँदपोल या चाँद द्वार से आम जनता प्रवेश करती थी। पश्चिम की तरफ़ से चाँद उदय के कारण इस द्वार का नाम चाँदपोल रखा गया। इस द्वार की सबसे ऊपरी मंजिल पर नोबतखाना बना हुआ है।

इसमें ढ़ोल-नगाड़े व तबले बजाये जाते थे। “नोबत” सके प्रकार का संगीत होता था। इस संगीत की बाद में कईं प्रकार बन गए। नोबत के कुछ विशिष्ठ नियम होते थे। श्रोताओं के लिए सबसे आवश्यक बात यह है कि इसे सुनते समय सभी ख़ामोश रहकर सुनें। यह परम्परा सिकंदर महान के समय से शुरू हुई थी।

Diwan-e-Khas | दीवान-ए-ख़ास (शीशमहल)

यह आमेर के महल का सबसे उत्कृष्ट नमूना है। इसका निर्माण राजा सवाई जय सिंह ने सन 1621-27 में करवाया था। जय सिंह के नाम पर ही इसका नाम जय मंदिर रखा गया।

इसमें कांच की सुंदर नक्काशी जड़ी हुई है। इसलिए इसे शीशमहल भी कहा जाता है। इसके निर्माण में जो शीशे उपयोग में लिए गए है, उन्हें बेल्जियम से मंगाया गया है।

कहा जाता है कि इस महल में अगर एक मोमबत्ती जलाने से ही यह चमक उठता है। इस महल में राजा अपने ख़ास मेहमानों से भेंट करते थे। इस महल के दरवाजों व खिड़कियों पर खुशबूदार घास के पर्दे लगे हुए थे।

गर्मियों में इन पर्दों को पानी से गीला किया जाता था। इससे ठंडी हवा आती थी। इसके सामने एक छोटा बगीचा है। इस बाग के पश्चिम दिशा में सुख-निवास स्थित है।

Diwan-e-Aam | दीवान-ए-आम

यह महल एक बैठक कक्ष होता था। यहाँ पर महाराजा अपनी जनता की फ़रियाद सुनते थे। इसमें 27 पिल्लर है, जो कि 2 प्रकार के पत्थरों से बने हुए है।

पहला पत्थर लाल रंग का है तथा दूसरा मार्बल का सफेद पत्थर है। मार्बल का सफेद पत्थर हिन्दू सभ्यता का व लाल पत्थर मुस्लिम संस्कृति का प्रतीक है।

Sheela Devi Temple | शीला देवी मंदिर

आमेर के किले में शीला देवी का मंदिर भी है। यह एक हिन्दू मंदिर है। राजा मान सिंह काली माता के बहुत बड़े पुजारी थे। उन्होंने शीला देवी की मूर्ति को बंगाल से मंगवाया था। कहते है कि राजा मान सिंह को केदार राजा से युद्ध में हार का सामना करना पड़ा था। उस समय उन्होंने काली माता की शरण ली।

काली माता जनकी भक्ति से खुश होकर उन्हें सपनें में विजय का वरदान दिया। इसी के परिणामस्वरूप उन्हें समुद्र में शीला देवी की मूर्ति मिली। जिसे राजा मान सिंह आमेर लेकर आये और मंदिर बनवाया।

कईं लोगों का मानना है कि केदार राजा ने पराजय स्वीकार करके अपनी पुत्री का विवाह मान सिंह के साथ कर दिया और मान सिंह को माता की मूर्ति भी भेंट की थी। शीला देवी के पूरे मंदिर में सफेद मार्बल का उपयोग किया है। आमेर की जनता शीला देवी को अपना रक्षक मानती थी।

आमेर किले के नाम से जुड़ी कहानियां

आमेर किले का नाम यहाँ स्थित अम्बिकेश्वर मंदिर से लिया गया है। यह मंदिर “चील के टीले” नामक पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव का मंदिर है।

कईं लोगों के अनुसार आमेर किले का नाम माता दुर्गा के नाम पर रखा गया है। प्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार इस किले के शासक राजपूत स्वयं को भगवान राम के पुत्र “कुश” के वंशज मानते है।

उन्हें यहीं से कुशवाहा नाम मिला, जो आगे जाकर कछवाहा हो गया। यहां संघी जूथाराम मंदिर से मिर्ज़ा राजा जय सिंह के काल के शिलालेख मिले है।

इस शिलालेख के अनुसार आमेर के किले का नाम अम्बावती था और यह ढूंढाड़ की राजधानी थी। यह शिलालेख फ़िलहाल पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में सुरक्षित है।

तो दोस्तों, यह था आमेर किले का सम्पूर्ण इतिहास। आगे अब आपको बताएंगे कि आपको आमेर जाते समय क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। चलिये शुरू करते है ।

आमेर जाने का सबसे उपयुक्त समय

जयपुर शहर को पर्यटक बहुत पसंद करते है। यहाँ पर प्रत्येक वर्ष लाखों पर्यटक घूमने आते है। जयपुर शहर एक गर्म प्रदेश है। गर्मियों में यहाँ की हालत बहुत खराब हो जाती है।

जून के महीने में तो यहाँ का तापमान 45 डिग्री से भी ऊपर तक चला जाता है। जयपुर में मानसून का समय जुलाई से सितंबर के मध्य रहता है। इस समय भी घूमना उचित नही है, क्योंकि इस समय बारिश के कारण उमस हो जाती है।

जयपुर व आमेर किले में घूमने का सबसे बढ़िया समय अक्टूबर से मार्च तक का महीना होता है। इन महीनों में यहाँ सूरज का ताप कम होता है। यह समय सर्दियों का समय होता है। इस समय तापमान 22 डिग्री के आसपास ही रहता है।

आमेर कैसे पहुँचे

जयपुर शहर में परिवहन की सेवाएं पूर्ण रूप से जुड़ी हुई है। जयपुर का हवाई अड्डा, शहर से 7 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जयपुर शहर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आपको नाहरगढ़ किले तक पहुंचना है, तो आपको ऑटो-रिक्श व बस के माध्यम से यहाँ पर आ सकते है।

यदि आपको रेलगाड़ी के माध्यम से अपना सफर करना है तो यहाँ से रेलवे स्टेशन 5 किलोमीटर दूर स्थित है। यह शहर से बिल्कुल अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

Sound and Light Show

आमेर किले में रात के समय में Sound and Light Show का आयोजन किया जाता है। इसमें आमेर किले का सम्पूर्ण इतिहास बताया जाता है। इसमें अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज दी है।

इसको गुलज़ार साहब ने लिखा है। यह बहुत ही अच्छा व मन को मोहित करने वाला show होता है। इसमें प्रवेश करने के लिए आपको अलग से शुल्क देना होगा।

Amer Fort Entry Fee (प्रवेश शुल्क):

 

भारतीय विद्यार्थी 10 रुपये
भारतीय निवासी25 रुपये
विदेशी विद्यार्थी 100 रुपये
विदेशी निवासी500 रुपये
हाथी की सवारी1100 रुपये

Light and Sound Show Entry Fee:

  • English – 200 रुपये
  • Hindi – 100 रुपये

Light and Sound Show Timing: 6:30 P.M. – 9:15 P.M.

Amer Fort Time Duration (प्रवेश समय अवधि): 3 -4 घण्टे

Amer Fort Entry Time (प्रवेश समय): 08:00 A.M. – 5:30 P.M.

आमेर जाने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर – मार्च

आमेर पहुँचने के साधन:

किले तक आप आसानी से किसी भी ऑटो-रिक्शा या बस के माध्यम से पहुँच सकते है।

आमेर जाते समय आवश्यक निर्देश व चेतावनी:

दोस्तों, आमेर की सड़के लम्बी घुमावदार व ढ़लान वाली है। मानसून के समय यहाँ फिसलन हो जाती है। इसलिए अगर आप यहाँ मानसून में सफ़र कर रहे है तो आपको सावधानी बरतनी चाहिए। Amer Fort History in Hindi

तो दोस्तों, यह था जयपुर के Amer Fort History in Hindi. आशा करता हूँ कि Amer Fort History के बारे में दी गयी जानकारी आप सभी को पसंद आयी होगी। अंत में दोस्तों में सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि Amer Fort जैसा अन्य किला शायद ही कोई और होगा। आशा करता हूँ की Amer Fort History के बारे में दी गयी जानकारी आपको जरूर पसंद आयी होगी। आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

अगर आपके मन में Amer Fort History से सम्बंधित किसी भी प्रकार का Question है तो आप हमसें Comment के माध्यम से पूछ सकते है। हम आपके प्रश्न का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। आगे भी हम आपके लिए ऐसे ही उपयोगी आर्टिकल लाते रहेंगे।

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