जयपुर के जयगढ़ किले का इतिहास !

जैसा कि आप सभी जानते है, हमारा जयपुर शहर अपनी ऐतिहासिक बहुमूल्य धरोहरों के लिए जाना जाता है। इतिहास की दृष्टि से जयपुर बहुत ही खास है। जयपुर को हम सब गुलाबी नगरी भी कहते है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि जयपुर की सम्पूर्ण दीवारें व घर सब कुछ गुलाबी रंग से रंगे हुए है।

दोस्तों, आज हम आपको जयपुर की सभी धरोहरों में से ही एक ऐतिहासिक बहुमूल्य ईमारत के बारे में बताएंगे, जिसका नाम है- जयगढ़ का किला। दोस्तों आप इस लेख को पूरा जरूर पढ़ियेगा।

मैं आपको दावे के साथ कह सकता हूँ कि इस लेख से आपको बहुत अच्छी व रोचक जानकारी प्राप्त होगी। तो चलिए दोस्तों, शुरू करते है

Jaigarh Fort | जयगढ़ का किला

दोस्तों, जयगढ़ का किला राजस्थान के जयपुर ज़िले में स्थित है। जयगढ़ का यह किला एक पहाड़ी पर स्थित है। जिसका नाम “चील का टीला” है। दोस्तों, यह एक अरावली पर्वतमाला है। यहाँ पर एक अन्य किला भी मौजूद है, जिसका नाम आमेर का किला है। जयगढ़ का किला, आमेर के क़िले से ऊपर की तरफ़ स्थित है।

दोस्तों, जयगढ़ किले का निर्माण सन 1726 ईस्वी में सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। जयगढ़ किले के निर्माण का उद्देश्य आमेर के महल व किले की सुरक्षा करना था।

इस किले का नाम इसके निर्माता के नाम पर ही रखा गया है। जयगढ़ के क़िले को “विजय का किला” भी कहा जाता है। दोस्तों, इस किले में विश्व की सबसे बड़ी तोप मौजूद है। इस तोप के बारे में नीचे सम्पूर्ण जानकारी दी गयी है।

जयगढ़ किले का इतिहास ।

जयगढ़ किले का निर्माण सन 1726 ईस्वी में हुआ था। इस किले का निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने आमेर के किले को सुरक्षित करने के लिए करवाया था। जयगढ़ किले की बनावट व संरचना आमेर के किले से मेल खाती है। दोस्तों, इस किले में विश्व की सबसे बड़ी तोप रखी गयी है, जिसका नाम “जयबाण” तोप है।

जयगढ़ का किला, आमेर के किले से 400 फ़ुट की ऊंचाई पर स्थित है। इस महल में प्रमुख रूप से राजा व उसके परिवार का आवास स्थान था, किन्तु बाद में इस किले को हथियारशाला में बदल दिया गया। जयगढ़ किले के पीछे इसका समृद्ध इतिहास है।

मुग़लों के शासन के समय जयगढ़ का किला जयपुर शहर से 150 मील दूर था। उपयोगी सामान व वस्तुओं के अधिक आयात के कारण जयगढ़ का किला मुख्य तोप ढुलाई केंद्र बन गया था। उस समय यहाँ पर हथियारों में गोला-बारूद व अन्य युद्ध के अस्त्र-शस्त्र रखे जाते थे। इन सभी सामग्रियों की निगरानी दारा शिकोह द्वारा की जाती थी।

उसके कुछ समय पश्चात औरंगजेब ने इस किले पर आक्रमण करके इस पर विजय प्राप्त कर ली। औरंगजेब ने सवाई जयसिंह को इस किले का सम्राट बना दिया। सवाई जयसिंह ने इस किले का पुनः फिर से निर्माण करवाया। जयगढ़ किले से जुड़ी एक बेहद रोचक कहानी भी है। तो चलिये अब आपको बताते है:- जयगढ़ किले की कहानी।

जयगढ़ किले के खजाने की कहानी ।

कहानी के अनुसार, जयगढ़ किले की ज़मीन में खज़ाना छुपा हुआ है। लोगों का मानना है कि यहाँ खज़ाना जयगढ़ क़िले कद शासकों ने छुपाया था। लेकिन यहाँ पर इस प्रकार का कोई भी खज़ाना अभी तक नही मिला है।

जयपुर शहर में जयगढ़ किले के ख़ज़ाने को खोजने के लिए 25 जून, सन 1975 में यहाँ पर आपातकाल घोषित किया गया था।

क़रीब 5 माह तक चली खोज-बीन के बाद इंदिरा सरकार ने कहा कि उन्हें यहाँ कुछ नही मिला। लेकिन यहाँ से अनेक ट्रक समान भरकर दिल्ली भेजें गए। इन सभी से पता चलता है कि उन्हें यहां पर खज़ाना मिल चुका था। ख़ज़ाने को खोजने स्वयं स्वर्गीय संजय गाँधी यहाँ पर आये थे।

इसके कुछ समय बाद यहाँ पर भारतीय सेना के जवानों ने खुदाई की। खुदाई पूरी होने के बाद सूचना मिली कि सिर्फ 230 कीलोग्राम चाँदी ही मिली है। इस सामान को ट्रकों में भरकर दिल्ली भेजा गया। तब से इस ख़जाने के बारे में किसी प्रकार का जिक्र नही हुआ है।

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जयगढ़ किले की बनावट व संरचना ।

दोस्तों, बनावट व संरचना में तो जयगढ़ का किला, आमेर के किले से मिलता-जुलता ही है। इस क़िले की लम्बाई 3 किलोमीटर अर्थात 1.9 मीटर है तथा चौड़ाई 1 किलोमीटर अर्थात 0.62 मीटर है। जयगढ़ किले में बहुत से महल व मंदिर मौजूद है। जिनमें आराम मंदिर, ललित मंदिर व लक्ष्मी विलास महत्वपूर्ण है।

इन सभी के अलावा जयगढ़ के किले में एक हथियारशाला व संग्रहालय भी मौजूद है। जयगढ़ व आमेर के किले दोनों एक -दूसरे से जुड़े हुए है। पुराने समय में आमेर के किले को ढूंढाड़ के नाम से प्रसिद्ध था।

जयगढ़ के किले को आमेर की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। पुराने समय में राजा यहाँ अतिथियों से मिला करते थे। जयगढ़ क़िले की दीवारें लाल बलुआ पत्थरों से बनाई गयी है। 

इस किले के बिल्कुल बीचों-बीच एक बहुत खूबसूरत बाग मौजूद है। जयगढ़ किले में बहुत विशाल दरवाज़े व पर्देदार खिड़कियां मौजूद है। दोस्तों, जयगढ़ के किले में जल एकत्रित करने की सुव्यवस्थित प्रणाली है।

इस किले में सेना विश्राम किया करती थी। इस किले की दीवारें क़रीब 3 किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। जयगढ़ किले के सबसे ऊँचे बिंदु पर “दिया” नामक बुर्ज स्थित है।

यह बुर्ज 7 मंजिला ईमारत पर स्थित है। इस बुर्ज से खड़े होकर पूरे शहर का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। दोस्तों, यहाँ पर बहुत प्राचीन 2 मंदिर है, जिनके नाम राम हरिहर मंदिर व काल भैरव मंदिर है।

राम हरिहर मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में करवाया गया था जबकि काल भैरव मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था। ये मंदिर बहुत ही आकर्षक है।

जयगढ़ के किले में कुल 2 प्रवेश द्वार है। इन्हें दंगूर द्वार व अवानी द्वार भी कहा जाता है। ये दरवाज़े दक्षिण व पूर्व दिशा में स्थित है। इस किले की रूपरेखा प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने तैयार की थी।

जयगढ़ के किले में जयपुर शहर की संस्कृति दिखाई देती है। जयगढ़ का किला एक बहुत ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। इसलिए इस किले से सम्पूर्ण जयपुर शहर दिखाई देता है।

अपनी विशाल दीवारों के कारण जयगढ़ का किला पूरी तरह से सुरक्षित है। यहाँ पर एक संग्रहालय भी मौजूद है, जिसमें राजाओं के प्राचीन वस्त्र, हथियार, पांडुलिपियां व कलाकृतियां मौजूद है।

जयगढ़ किले के बिल्कुल बीच में एक खम्भा मौजूद है। इस खम्भे पर से सैनिक राज्य व किले पर पहरा देते थे। यहाँ से किले का आकर्षक दृश्य दिखाई देता है। आमेर व जयगढ़ के किले एक गुप्त रास्ते से जुड़े हुए है। इस गुप्त रास्ते का निर्माण आपातकाल की स्थिति में औरतों व बच्चों को किले से बाहर निकालने के लिए किया गया था।

विश्व की सबसे विशाल जयबाण तोप ।

जयगढ़ किले के ऊपरी तरफ़ एक बहुत बड़ी तोप रखी हुई है, जिसका नाम “जयबाण” तोप है। इस तोप का वजन क़रीब 50 टन है। दोस्तों, जयबाण तोप में 8 मीटर की लम्बाई वाले बैरल रखे जा सकते है। यह तोप विश्व की सबसे अधिक प्रसिद्ध तोप है। Jaigarh Fort History

जयगढ़ जाने का सबसे उपयुक्त समय ।

जयपुर शहर को पर्यटक बहुत पसंद करते है। यहाँ पर प्रत्येक वर्ष लाखों पर्यटक घूमने आते है। जयपुर शहर एक गर्म प्रदेश है। गर्मियों में यहाँ की हालत बहुत खराब हो जाती है।

जून के महीने में तो यहाँ का तापमान 45 डिग्री से भी ऊपर तक चला जाता है। जयपुर में मानसून का समय जुलाई से सितंबर के मध्य रहता है। इस समय भी घूमना उचित नही है, क्योंकि इस समय बारिश के कारण उमस हो जाती है।

जयपुर व जयगढ़ किले में घूमने का सबसे बढ़िया समय अक्टूबर से मार्च तक का महीना होता है। इन महीनों में यहाँ सूरज का ताप कम होता है। यह समय सर्दियों का समय होता है। इस समय तापमान 22 डिग्री के आसपास ही रहता है।

जयगढ़ किले तक कैसे पहुँचे ।

जयपुर शहर में परिवहन की सेवाएं पूर्ण रूप से जुड़ी हुई है। जयपुर का हवाई अड्डा, शहर से 7 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जयपुर शहर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आपको नाहरगढ़ किले तक पहुंचना है, तो आपको ऑटो-रिक्श व बस के माध्यम से यहाँ पर आ सकते है।

यदि आपको रेलगाड़ी के माध्यम से अपना सफर करना है तो यहाँ से रेलवे स्टेशन 5 किलोमीटर दूर स्थित है। यह शहर से बिल्कुल अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

Jaigarh Fort Entry Fee (प्रवेश शुल्क)

  • भारतीय निवासी – 35 रुपये
  • विदेशी पर्यटक – 85 रुपये

जयगढ़ किले में प्रवेश समय अवधि:

  • 3 -4 घण्टे

Jaigarh Fort Entry Time (प्रवेश समय):

  • 09:00 A.M. – 5:00 P.M.

जयगढ़ जाने का सबसे अच्छा समय:

  • अक्टूबर – मार्च

जयगढ़ पहुँचने के साधन:

किले तक आप आसानी से किसी भी ऑटो-रिक्शा या बस के माध्यम से पहुँच सकते है।

जयगढ़ जाते समय आवश्यक निर्देश व चेतावनी:

दोस्तों, जयगढ़ की सड़के लम्बी घुमावदार व ढ़लान वाली है। मानसून के समय यहाँ फिसलन हो जाती है। इसलिए अगर आप यहाँ मानसून में सफ़र कर रहे है तो आपको सावधानी बरतनी चाहिए।

तो दोस्तों, यह थी गुलाबी नगर जयपुर के Jaigarh Fort History. आशा करता हूँ कि Jaigarh Fort History के बारे में दी गयी जानकारी आप सभी को पसंद आयी होगी। अंत में दोस्तों में सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि Jaigarh Fort जैसा अन्य किला शायद ही कोई और होगा। आशा करता हूँ की Jaigarh Fort History के बारे में दी गयी जानकारी आपको जरूर पसंद आयी होगी। आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

अगर आपके मन में Jaigarh Fort History से सम्बंधित किसी भी प्रकार का Question है तो आप हमसें Comment के माध्यम से पूछ सकते है। हम आपके प्रश्न का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। आगे भी हम आपके लिए ऐसे ही उपयोगी आर्टिकल लाते रहेंगे।

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