ईद-उल-फितर पर निबंध

इस दुनिया में अनेकों धर्म के लोग रहते है। इन धर्मों में इनके कईं त्यौहार व उत्सव भी होते है। सभी धर्मों में लोग अपने-अपने त्यौहारों को बड़े चाव तथा खुशी से मनाते है। जैसा कि मैंने आपको बताया है कि इस दुनिया में बहुत से धर्म है और इन धर्मों के अपने-अपने त्यौहार होते है।

तो आज हम आपके लिए लेकर आये है- मुस्लिम धर्म का ईद-उल-फितर का त्यौहार। तो दोस्तों, आपसे अनुरोध है कि इस आर्टिकल को पूरा पढ़ना। आपको इस आर्टिकल में बहुत सी उपयोगी जानकारियां मिलेगी। यह आर्टिकल आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होने वाला है। तो चलिये शुरू करते है।

ईद-उल-फितर

ईद-उल-फितर मुस्लिम धर्म में सबसे बड़ा व सबसे खास त्यौहार माना जाता है। ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहते है। मुस्लिम धर्म के लोग रमजान के माह में रोजा रखते है। तथा जब रमजान खत्म होने वाला होता है तो लोग एक महीने तक उपवास रखते है।

रमजान के खत्म होने के बाद यह शुभ दिन आता है। जिसे सभी लोग बड़ी खुशी के साथ मनाते है। ईद-उल-फितर का त्यौहार रमजान के खत्म होने के बाद चाँद के दिखने पर मनाया जाता है। मुस्लिम कैलेंडर के हिसाब से ईद-उल-फितर का त्यौहार हर साल 10वें महीनें में आता है। यह महीना शव्वाल के नाम से भी जाना जाता है।

शव्वाल का पहला दिन ही ईद-उल-फितर का दिन होता है। ईद-उल-फितर लगातार 3 दिनों तक मनाया जाता है। सबसे पहली बार ईद-उल-फितर सन 624 ईस्वी में मनाया गया था। इस त्यौहार को पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद ने बद्र को युद्ध में परास्त करने की कबुशी में मनाया था। 

ईद-उल-फितर का इतिहास |

मुस्लिम धर्म कद अनुसार एक पूर्ण व नेक मुस्लिम होने के लिए सिर्फ मुस्लिम धर्म मद जन्म लेना काफ़ी नही है। मुस्लिम धर्म के कुल 5 ऐसे नियम है। जिनका पालन करना अनिवार्य है।

ये नियम है- नमाज़ अदा करना, रोजा, ईमान, हज की यात्रा और ज़कात उर्फ दान। इन सभी नियमों का पालन करने वाला मनुष्य ही एक पूर्ण नेक मुस्लिम माना जाता है।

ईद-उल-फितर के इतिहास को बयां करने आली एक कहानी है। इस कहानी के बारे में हम आपको बताने जा रहे है। यह बात बहुत पुरानी है। एक बार अरब देश में पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद ने देखा कि यहाँ सभी लोगों में कट्टरता की भावना है। यहाँ पर सभी एक-दूसरे से नफरत करते है तथा लोग एक-दूसरे से दूरियां बना रहे है।

इस समय पूरा अरब अमीर-ग़रीब के पक्षपात में टूट रहा है। फब सभी लोगों को फिर से मिलाने के लिए पैग़म्बर साहब ने बहुत सोच-समझकर विचार किया। उन्होंने सभी लोगों को एक नियम का पालन करने का आदेश दिया। Eid-ul-Fitr Essay। इस नियम का नाम रोजा था।

पैग़म्बर साहब ने कहा कि इस नियम के मुताबिक़ हम सभी पूरे दिन तक कुछ नही खायेंगे और ना ही जल ग्रहण करेंगे। किसी भी प्रकार का अन्न हो या फिर कोई पकवान हो। हम सभी को उनका त्याग करना है। पैग़म्बर साहब का कहना था कि ऐसा करने से हम सभी के अंदर त्याग और बलिदान की भावना जाग्रत होगी तथा हम एक-दूसरे के दुःखों को महसूस कर सकेंगे।

सभी के मन में सद्भावना जाग्रत होगी। पैग़म्बर साहब ने कहा कि नियम का पालन करने के बाद सभी को ज़कात-उल-फितर नियम का पालन करना है। सभी लोगों ने इसका पालन किया और परिणामस्वरूप वहाँ के लोगों में प्रेम-भावना जाग्रत हुई।

ईद-उल-फितर का त्यौहार कैसे मनाया जाता है ?

दोस्तों, ईद-उल-फितर के दिन मुस्लिम लोग सुबह जल्दी उठकर नहा लेते है। इस दिन सभी लोग नये-नये कपड़े पहनते है। सभी लोग इस दिन नमाज़ पढ़ते है। सभी लोग अपने-अपने घरों की सफाई तथा सजावट करते है।

ईद-उल-फितर के दिन सभी घरों में मिठाइयां बनाईं जाती है। सभी घरों में इस दिन मिठाइयों में मुस्लिमों की पसंदीदा “सिवइयां” बनाईं जाती है।

इस दिन कोई भी इंसान भूखा नही सोता। ईद-उल-फितर के दिन सभी लोग अपने रिश्तेदारों के घर जाते है। सभी लोग एक-दूसरे के गले भी मिलते है। घर के बड़े सदस्य अपने से छोटे सदस्यों को कुछ न कुछ उपहार देते है।

जिसे “ईदी” कहा जाता है। ईद-उल-फितर का त्यौहार प्रेम, सहानुभूति व भाईचारें का त्यौहार है। इस दिन सभी लोग अपने पुराने गिले-शिक़वे मिटाकर प्रेम से गले मिलते है।

अनेक स्थानों पर तो ईद के मेले भी लगते है। यह त्यौहार समानता व सद्भावना का प्रतीक है। इस दिन चाहे कोई छोटा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब, सभी खुशी के साथ यह त्यौहार मनाते है।

इस दिन लोव अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पूण्य भी करते है। जिसे ज़कात-उल-फितर का जाता है। Eid-ul-Fitr Essay। दोस्तों, रमज़ान की इबादतों का तथा रोजा रखने का इनाम ही ईद-उल-फितर है।

यह खुदा का उनके बन्दों को दिया हुआ नेक तोहफ़ा है। सभी लोग इस दिन अल्लाह से दुआ मांगते है तथा खुदा का शुक्रिया अदा करते है। कुरान में कहा गया है कि जब रमज़ान को पूरा करने के बाद रोज़ो-नमाज़ों व अन्य सभी कामों को पूरा कर लेते है तो खुदा उन्हें ईनाम से नवाज़ता है। रमज़ान की 27वीं रात को शब-ए-कद्र कहा जाता है। इस दिन कुरान का अवतरण हुआ था।

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अंत में दोस्तों में सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि Eid-ul-Fitr Essay का त्यौहार प्रेम,खुशी व भाईचारे का त्यौहार है। हम सभी को प्रेम-पूर्वक मिलकर रहना चाहिए तथा सभी को साथ लेकर आगे बड़बना चाहिए। आशा करता हूँ कि Essay on Eid-ul-Fitr के बारे में यह कहानी आपको जरूर पसंद आयी होगी। आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

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